मजहब और रिलीजन धर्म का पर्यायवाची नहीं हो सकते : नीरजा माधव
आरएसएस के शताब्दी वर्ष में हिन्दू सम्मेलन वाराणसी,4 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष में रविवार को भी उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में सकल हिन्दू समाज काशी मध्य भाग की ओर से नगर में कई जगह हिन्दू सम्मेलन का आ
आरएसएस के शताब्दी वर्ष में हिन्दू सम्मेलन


आरएसएस के शताब्दी वर्ष में हिन्दू सम्मेलन

वाराणसी,4 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष में रविवार को भी उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में सकल हिन्दू समाज काशी मध्य भाग की ओर से नगर में कई जगह हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। म​हमूरगंज स्थित श्रृंगेरी मठ परिसर में आयोजित सम्मेलन में संघ के क्षेत्र ग्राम्य विकास संयोजक चन्द्रमोहन ने कहा कि व्यक्ति से व्यवस्था बदलती है। व्यवस्थाएं तभी टिकती हैं जब समाज उसे अपना कार्य समझे। समाज को अपना दायित्व बोध होने पर व्यवस्था परिवर्तन होता है।

श्रीमद्भागवद्गीता के अनुसार शरीर लक्ष्य तय करता है। इस लक्ष्य प्राप्ति के लिए यदि हम साधन जुटा ले तो देवताओं का आशीर्वाद मिल ही जाता है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब आप्टे का विचार था कि किसी कार्य को करने के लिए कुछ लोग सारा समय दें और सारे लोग कुछ समय दें। सौ वर्षों से इसी कार्य पद्धति का पालन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्यक्ति निर्माण, व्यवस्था परिवर्तन और समाज परिवर्तन कर रहा है। जिसका परिणाम अब दिखने लगा है। व्यवस्था परिवर्तन के लिए उन्होंने पंच परिवर्तन को महत्वपूर्ण माना।

सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि गोविन्द मठ के महन्त स्वामी जगदीश्वरानन्द महाराज ने कहा कि कई देशों ने भारतवर्ष को तोड़ने का प्रयास किया। वर्तमान के वर्षों में भी भारत के नागरिकों को तोड़ने का प्रयास हुआ है।

सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि साहित्यकार नीरजा माधव ने कहा कि जिस प्रकार हनुमान जी को उनका बल स्मरण कराना पड़ता है, उसी प्रकार हिन्दू समाज को भी उसका गौरव बताना पड़ता है। जिस भारत ने पूरे विश्व को आध्यात्मिक, भौतिक, शा​रीरिक, मानसिक पोषण दिया उस विचार का नाम है— भारत बोध। मजहब और रिलीजन धर्म का पर्यायवाची नहीं हो सकते। क्योंकि धर्म की सदस्यता कभी समाप्त नहीं होती। भारत बोध सनातन संस्कृति की बात करता है। जो बरगद की तरह विशाल है। जहां एक ओर अन्य सम्प्रदाय धन या प्रलोभन से अपनी संख्या बढ़ाते हैं, वहीं हिन्दू संस्कृति व्यक्त से अव्यक्त की ओर चलने का आमंत्रण देता है। दीपक जलाना, घण्टी बजाना वाह्य आडम्बर नहीं है, इसके बिना मानसिक विकास नहीं हो सकता। हम वेदों के उत्तराधिकारी हैं। हमने अपनी आजादी स्वभाषा, स्वदेशी और स्वराज के आधार पर प्राप्त की।

सम्मेलन की अध्यक्षता सीए सतीश जैन ने की। मंचासीन ​अतिथियों में चल्ला अन्नपूर्णा शास्त्री प्रबन्धक श्रृंगेरी मठ, चल्ला सुब्बाराव शास्त्री महन्त​ चिन्तामणि गणेश मन्दिर रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ आर0 के0 ओझा और संयोजन अरविन्द रस्तोगी ने किया। सम्मेलन में ​वरिष्ठ प्रचारक श्याम जी, काशी विभाग कार्यवाह राजेश, अनिल ​किंजवाडेकर, प्रदीप चौरसिया आदि की उपस्थिति रही।

इसी क्रम में काशी दक्षिण भाग के कर्दमेश्वरनगर अमरेश्वर महादेव मंदिर खैरा में आयोजित हिंदू सम्मेलन में मुख्य वक्ता अरविंद प्रांत गौ सेवा प्रमुख काशी प्रांत रहे। उन्होंने हिंदू और हिंदुत्व को स्पष्ट करते हुए उपस्थित हिंदुओं को अपने धर्म और कर्म के लिए जागरूक और प्रेरित किया। हिंदुओं को एकजुट रहते हुए सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व के जागरण और नागरिक अनुशासन के लिए प्रेरित किया। महेंद्र के अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ किया गया। कार्यक्रम का समापन वंदेमातरम और भारत माता आरती के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन रामाशीष ने किया। इसी क्रम में अस्सी स्थित मुमुक्षू भवन में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को संघ के काशी विभाग के विभाग बौद्धिक शिक्षण प्रमुख नवीन किया। इसी क्रम में सुन्दरपुर सरायनन्दन स्थित चौरा माता मन्दिर पर आयोजित हिन्दू सम्मेलन को भाग प्रचार प्रमुख रविकान्त ने सम्बोधित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी