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गोरखपुर, 04 जनवरी (हि.स.)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने वैश्विक अकादमिक सहभागिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कनाडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
यह पाँच वर्षीय समझौता भारत और कनाडा के बीच शिक्षा, अनुसंधान तथा उद्योग–अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सशक्त पहल है।
यह समझौता कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की उस दूरदर्शी सोच का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब है, जिसके अंतर्गत भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और प्रतिष्ठित बनाने पर विशेष बल दिया गया है। उनका दृष्टिकोण कि भारतीय ज्ञान परंपरा आधुनिक वैश्विक चुनौतियों के साथ समन्वित होकर विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के लिए तैयार करे, इस एमओयू के माध्यम से साकार होता दिखाई देता है।
इस समझौते के अंतर्गत छात्र एवं शिक्षक विनिमय कार्यक्रम, विज्ञान, मानविकी एवं विधि जैसे विषयों में संयुक्त शोध परियोजनाएँ, विशेष अकादमिक पाठ्यक्रमों का विकास तथा अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। विशेष रूप से स्नातकोत्तर एवं शोध छात्रों के मार्गदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें कनाडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स कनाडा में गोरखपुर विश्वविद्यालय के विस्तारित अकादमिक एवं शोध मंच के रूप में कार्य करेगा। इसके साथ ही संयुक्त ऑनलाइन/हाइब्रिड डिग्री कार्यक्रमों की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। समझौते में बौद्धिक संपदा अधिकार, संयुक्त प्रकाशन, गोपनीयता तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं से संबंधित स्पष्ट प्रावधान भी किए गए हैं।
कनाडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स मुख्य रूप से एक व्यावसायिक एवं आर्थिक संगठन है, परंतु यह अकादमिक योगदान और बौद्धिक विमर्श को प्रोत्साहित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह संगठन स्वयं प्राथमिक शोध न करते हुए अकादमिक जगत, उद्योग, नीति-निर्माण और वैश्विक हिंदू प्रवासी समुदाय के बीच सेतु के रूप में कार्य करता है, जिससे शिक्षा और अनुसंधान के नए अवसर सृजित होते हैं। कनाडा की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कनाडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन नरेश कुमार चावड़ा ने किया।
विश्वविद्यालय की ओर से इस एमओयू पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कुलसचिव धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव एवं वित्त अधिकारी जय मंगल राव सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा, “यह समझौता दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह पारंपरिक अकादमिक सहयोग से आगे बढ़कर भारतीय उच्च शिक्षा और वैश्विक हिंदू प्रवासी समुदाय के बौद्धिक एवं उद्यमशील पारिस्थितिकी तंत्र के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण करेगा। इस सहयोग से हमारे छात्रों और शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन, शोध, नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता के अभूतपूर्व अवसर प्राप्त होंगे। हमें विश्वास है कि यह साझेदारी विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान को और अधिक सुदृढ़ करेगी तथा मूल्य-आधारित, समग्र और वैश्विक दृष्टि से प्रासंगिक शिक्षा को बढ़ावा देगी।”
यह सहयोग विश्वविद्यालय की NAAC से प्राप्त A++ मान्यता तथा “आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” के आदर्श वाक्य के अनुरूप है तथा वैश्विक मंच पर बढ़ती साख और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी सक्रिय एवं दूरदर्शी सोच का प्रमाण है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय