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फरीदाबाद, 03 जनवरी (हि.स.)। फरीदाबाद में 31 जनवरी से 15 फरवरी तक आयोजित होने वाले 39वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में इस बार थीम स्टेट के रूप में उत्तर प्रदेश को चुना गया है, जो अपनी समृद्ध लोक कलाओं, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत के साथ मेले में विशेष पहचान बनाएगा। उत्तर प्रदेश के स्टॉलों पर फिरोजाबाद की रंग-बिरंगी कांच की चूडिय़ां, कन्नौज की विश्वप्रसिद्ध इत्र परंपरा, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और वाराणसी, लखनऊ व भदोही की जरी-जरदोजी कला पर्यटकों को खास तौर पर आकर्षित करेगी।सरकारी प्रवक्ता ने शनिवार को बताया कि पर्यटन विभाग प्रदेश की लोक संस्कृति को दर्शाने के लिए पारंपरिक नृत्य, संगीत, हथकरघा, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजनों का भव्य प्रदर्शन करेगा। इस वर्ष सूरजकुंड मेला कई नए प्रयोगों के कारण खास रहेगा। एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 40 विशेष हस्तशिल्प स्टॉल लगाए जाएंगे, जिससे कारीगरों को अपनी कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। सूरजकुंड मेला 2026 में सांस्कृतिक गतिविधियों और सुविधाओं का दायरा पहले से अधिक विस्तृत होगा। मेले में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें लोक नृत्य, लोकगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी। इसके अलावा तीन विशेष अवसरों पर फैशन शो का आयोजन किया जाएगा, जिसमें पारंपरिक और आधुनिक वेशभूषा, आभूषण और डिजाइन प्रदर्शित किए जाएंगे।मेला परिसर में विभिन्न जिलों की पहचान को दर्शाने के लिए पाथवे पर मूंज बुनाई, धान की बालियां, खुर्जा पॉटरी और ब्लैक पॉटरी से प्रेरित डिजाइन उकेरे जाएंगे। हर जिले और शिल्प के लिए विशेष साइनेज और क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से पर्यटक शिल्प निर्माण प्रक्रिया, कारीगरों की जानकारी और जिले की सांस्कृतिक पहचान के बारे में जान सकेंगे। मेले में पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ, असम के कामाख्या मंदिर और मेघालय की खासी हिल्स जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों की झलक प्रदर्शित की जाएगी। इसके साथ ही असम, अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम की लोक कलाएं, पारंपरिक वेशभूषा और खानपान भी पर्यटकों को देखने को मिलेगा। 39वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में इस बार करीब 1300 से अधिक स्टॉल लगाने की योजना है। हर स्टॉल किसी न किसी राज्य या देश की संस्कृति को दर्शाएगा। मेले के नोडल अधिकारी हरविंद्र सिंह यादव ने बताया कि कि इस मेले में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचेंगे और भारत की संस्कृति को करीब से जानने का अवसर पाएंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / -मनोज तोमर