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— भारतीय उद्योग संगठन सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि रहे उपस्थित
वाराणसी, 10 जनवरी (हि.स.)। हथकरघा एवं वस्त्र विभाग, उत्तर प्रदेश की पहल पर शनिवार को वाराणसी स्थित सर्किट हाउस में रमना-लंका क्षेत्र में प्रस्तावित सिल्क पार्क के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता आयुक्त एवं निदेशक, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, उत्तर प्रदेश (कानपुर) ने की।
कार्यक्रम में मंडलायुक्त वाराणसी, जिलाधिकारी वाराणसी, संयुक्त आयुक्त हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग कानपुर, सहायक आयुक्त हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, संयुक्त आयुक्त उद्योग सहित विभिन्न वस्त्र एवं उद्योग संगठनों के प्रमुख और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक के दौरान आयुक्त एवं निदेशक ने सभी हितधारकों से संवाद स्थापित करते हुए उनके सुझावों एवं प्रश्नों पर विस्तृत चर्चा की और विभागीय स्तर पर समाधान का आश्वासन दिया।
—उद्योग संगठनों ने रखे सुझाव
भारतीय उद्योग संगठन (आईआईए) के प्रतिनिधि आर.के. चौधरी ने वस्त्र नीति-2022 से जुड़े लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए विभाग का आभार व्यक्त करते हुए लघु उद्योग प्राधिकरण की स्थापना पर बल दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 97 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग कार्यरत हैं, जिनमें 87 प्रतिशत सूक्ष्म इकाइयां हैं।
स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधि राजेश भाटिया ने सिल्क पार्क में कॉरुगेटेड बॉक्स फैक्ट्री स्थापित करने का सुझाव दिया ताकि उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग सुनिश्चित हो सके। बनारसी वस्त्रोद्योग संघ के प्रतिनिधि देवेंद्र मोहन पाठक ने वाराणसी में टेक्सटाइल पार्क की स्थापना के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया।
एस.एन.डी. के प्रतिनिधि भरत शाह ने शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने की मांग की ताकि औद्योगिक गतिविधियाँ जल्द प्रारंभ हो सकें। पूर्वांचल उद्योग निर्यात संघ के प्रतिनिधि अमिताभ ने अपने 25 वर्षों के निर्यात अनुभव के आधार पर सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को प्राथमिकता देने तथा हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग दोनों को समान रूप से शामिल करने का सुझाव दिया।
—पीपीटी के माध्यम से उठाए गए प्रमुख मुद्दे
बनारसी वस्त्रोद्योग संघ द्वारा पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से पार्क की समय-सीमा, भूमि आवंटन का आकार, शेड की ऊँचाई, बहुमंजिला भवन की अनुमति, भुगतान प्रक्रिया, रोजगार लक्ष्य, उच्च गति मशीनों की अनुमति, जीएसटी व्यवस्था एवं सीएनजी उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधि राजेश सिंह ने सिल्क स्टोरेज सुविधा एवं नकली धागों पर नियंत्रण की आवश्यकता बताई। सहकार भारती के शैलेश सिंह ने नई पीढ़ी को हथकरघा उद्योग से जोड़ने, जरी उद्योग, अनुसंधान एवं विकास केंद्र तथा प्राकृतिक रेशों के उपयोग की अनुशंसा की। हिंदू बुनकर कल्याण समिति के मनोज कुमार ने कढ़ाई इकाई की स्थापना का सुझाव दिया। बुनकर स्टूडियो के यासीन अंसारी ने सिल्क उत्पादों में पॉलिएस्टर के उपयोग पर रोक लगाते हुए केवल प्राकृतिक यार्न के उपयोग की बात कही और प्रिंटिंग एवं कढ़ाई को मूल्य संवर्धन परियोजनाओं में शामिल करने का सुझाव दिया। बनारसी वस्त्रोद्योग बुनकर संघ के राकेश कांत राय ने जिपर, बटन जैसे सहायक उद्योगों को शामिल करने, आवासीय एवं छात्रावास सुविधा, लघु डाइंग इकाइयों और यार्न बैंक की स्थापना की मांग रखी।
—प्रशासन एवं विभाग का आश्वासन
जिलाधिकारी वाराणसी सत्येंद्र कुमार ने जानकारी दी कि विकास प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहित भूमि में से आवश्यक भाग उद्योगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही रॉ मैटेरियल बैंक एवं यार्न बैंक की सुविधा प्रदान की जाएगी। निफ्ट एवं भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान के सहयोग से अनुसंधान एवं विकास कार्य किया जाएगा तथा बुनकर सेवा केंद्र, जरी एवं एंब्रॉयडरी उद्योग, प्रोसेसिंग एवं डाइंग यूनिट की स्थापना भी प्रस्तावित है।
उन्होंने बताया कि टेक्सटाइल पार्क की ब्रांडिंग की जाएगी तथा सिल्क उत्पादों के प्रमाणीकरण हेतु सिल्क मार्क और जीआई टैग सुनिश्चित किया जाएगा। बनारसी साड़ी के लिए ऐसा मंच विकसित किया जाएगा जहाँ उत्पादन और विपणन एक साथ हो सके, जिससे खरीदारों का हैंडलूम उत्पादों पर विश्वास बना रहे। मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने कहा कि टेक्सटाइल पार्क की परिकल्पना को दो वर्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का भी समर्थन मिला था और केंद्र सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने बनारसी ब्रांड को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करने पर जोर दिया।
आयुक्त एवं निदेशक, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग ने बताया कि निट्रा द्वारा फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है तथा डीपीआर 90 दिनों के भीतर प्राप्त हो जाएगी। लगभग एक वर्ष के भीतर टेक्सटाइल पार्क को प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी