60 पैसे खर्च कर चबाएं डिस्प्रिन, गोल्डन आवर को सुरक्षित करें हृदयरोगी : डा. राकेश वर्मा
कानपुर, 11 जनवरी (हि.स.)। हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा पड़ना ऐसी परिस्थिति में रोगी को घबराने की बजाय तुरंत ही दो टेबलेट डिस्प्रिन चबाकर खाने से अटैक के खतरे से होने वाले नुकसान को 40 प्रतिशत रोका जा सकता हैं। यानी करीब 30 पैसे की आने वाली यह टेबलेट
डा राकेश वर्मा की फाइल फ़ोटो


कानपुर, 11 जनवरी (हि.स.)। हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा पड़ना ऐसी परिस्थिति में रोगी को घबराने की बजाय तुरंत ही दो टेबलेट डिस्प्रिन चबाकर खाने से अटैक के खतरे से होने वाले नुकसान को 40 प्रतिशत रोका जा सकता हैं। यानी करीब 30 पैसे की आने वाली यह टेबलेट रोगी के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। अटैक आने पर शुरुआती चार घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। जिन्हें डॉक्टरी भाषा मे गोल्डन ऑवर कहा जाता हैं लेकिन अक्सर लोग ऐसी स्थिति में इसे शरीर मे गैस की समस्या को समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जिसका खामियाजा उन्हें अपनी जान गवांकर करना पड़ता है। यह जानकारी रविवार को ह्रदय रोग संस्थान के निदेशक डॉ राकेश वर्मा ने दी।

डॉ वर्मा ने बताया कि वर्तमान के खानपान और भाग दौड़ भरी जिंदगी में खुद का ख्याल न रखना। विशेष तौर पर शीतलहर के समय उसे अनदेखा करना। हार्ट अटैक का कारण बनता है। क्योंकि जब मनुष्य के शरीर में खून का थक्का जमने लगता है तो वह हार्ट अटैक का रूप ले लेता है लेकिन यह बड़ी विडंबना बना है कि लोग शुरुआती समय में इसे कुछ और ही समझ लेते हैं और वक्त जाया करते हैं। जिस वजह से कभी-कभी उन्हें अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ता है।

आगे उन्होंने कहा कि हार्ट अटैक ऐसी स्थिति में प्राथमिक उपचार बेहद आवश्यक है। यदि किसी को भी इस तरह की समस्या हो तो तुरंत ही 30 पैसे की कीमत की आने वाली डिस्प्रिन टेबलेट को चबाकर पानी पी लेने से अटैक के खतरे को 40 प्रतिशत तक कम कर अस्पताल पहुंचने का समय मिल सकता है। शुरुआती चार घण्टे निर्णायक होते हैं। डिस्प्रिन टेबलेट में पाए जाने वाले रसायन तुरंत ही शरीर में प्रवेश कर जम रहे खून के धक्कों को पतला करते हैं। जिससे रोगी को काफी हद तक फायदा मिलता है।

दिल का दौरा पड़ने पर इसकी पहचान या शुरुआती लक्षण- जैसे सीने में असहनीय दर्द, बाएं हाथ या जबड़े में दर्द, किसी भी मौसम में अचानक पसीना आना और सांस लेने में परेशानी यानी यह गोल्डन ऑवर की ही शुरुआत होती है। इसी स्थिति के दौरान रोगी को तुरंत ही दो टेबलेट डिस्प्रिन की अच्छे से चबाकर खानी चाहिए। चबाकर लेने पर यह जल्दी खून में घुल जाती है और थक्के बनने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है, जिससे मरीज को अस्पताल पहुंचने के लिए जरूरी समय मिल जाता है।

आगे उन्होंने यह भी कहा कि डिस्प्रिन टेबलेट किसी तरह का कोई इलाज नहीं बल्कि एक तरह की आपातकालीन स्थिति में एक प्रकार की मदद है। जिसके जरिए रोगी को अस्पताल पहुंचाने का समय मिल जाता है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप