उज्जैनः राज्य स्तरीय युवा उत्सव का समापन समारोह सम्पन्न
उज्जैन , 10 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य विवि के संयोजन में चल रहे तीन दिवसीय अभ्युदय युवा उत्सव के समापन दिवस पर शनिवार को आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में युवाओं ने अपनी प्रतिभाओं के रंग बिखेरे। उन्होने अपनी प्रस्त
]राज्य स्तरीय युवा उत्सव का समापन समारोह सम्पन्न


उज्जैन , 10 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य विवि के संयोजन में चल रहे तीन दिवसीय अभ्युदय युवा उत्सव के समापन दिवस पर शनिवार को आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में युवाओं ने अपनी प्रतिभाओं के रंग बिखेरे। उन्होने अपनी प्रस्तुतियों में समग्रता,एकाकारिता तथा संवेदनशीलता को भी उजागर किया। उन्होने दिखा दिया कि नई पीढ़ी के हाथों भारत का भविष्य सुरक्षित है।

राज्य स्तरीय युवा उत्सव अभ्युदय का शनिवार को समापन हुआ। विवि के हर मंच से युवाओं ने अपनी योग्यता को दोहराया। अंतिम दिन की सबसे प्रभावशाली और हृदयस्पर्शी प्रस्तुति मूक अभिनय प्रतियोगिता में देखने को मिली। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर द्वारा प्रस्तुत ऑपरेशन सिंदूर ने समाज को आतंकवाद की विभीषिका और भारतीय सेना के अदम्य साहस का संदेश दिया। कहानी एक सुखी परिवार की कश्मीर यात्रा से शुरू होती है, जहां अचानक हुए आतंकी हमले में एक सुहागन का सिंदूर उजड़ जाता है। बिना एक शब्द बोले, कलाकारों ने उस पीड़ा, चीख और फिर भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के शौर्य को मंच पर उतारा। इसे इस उत्सव की सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों में से एक माना गया।

समाज की कुरीतियों पर तीखा प्रहार

मुक्ताकाशी मंच पर 14 विश्वविद्यालयों के दलों ने हास्य और व्यंग्य के माध्यम से समाज में प्रचलित पापा की परी जैसे जुमलों की हकीकत और किन्नर समाज के प्रति हमारे नजरिए को संजीदगी से पेश किया। 10 मिनट की समय सीमा में दिखाया कि कैसे हमारी सोच इन समुदायों के प्रति संकीर्ण बनी हुई है। मूक अभिनय में पं. शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय (शहडोल) के दल ने पृथ्वीराज रासो के माध्यम से सम्राट पृथ्वीराज चौहान के स्वाभिमान को जीवंत किया, वहीं अन्य दलों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन दर्शन को पर्दे पर उतारा।

पोस्टर में उतरा आदिवासी गौरव

विक्रमादित्य शोध पीठ में जनजाति संस्कृति (पोस्टर मेकिंग) प्रतियोगिता में क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय (गुना) के छात्र ने जननायक बिरसा मुंडा के संघर्ष को उकेरा। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की अनुश्री नामदेव ने आदिवासी जड़ों की रक्षा का संदेश दिया। मयंक परमार (उज्जैन) ने गोंड ट्राइबल आर्ट की बारीकियों से मन मोहा। खरगोन की छात्रा ने एकता और ग्वालियर के छात्र ने जनजातीय महिला सशक्तिकरण को कैनवास पर स्थान दिया। महंगाई विषय पर 13 विश्वविद्यालयों के प्रतिभागियों ने तीखे व्यंग्य बाण चलाए। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के प्रतिभागी ने आम आदमी की जेब पर पड़ती महंगाई की मार को अपनी कल्पनाशीलता से खूबसूरती से उकेरा।

बौद्धिक रणभूमि और सुरों की सरिता

प्रश्न मंच में भारतीय संस्कृति और सम्राट विक्रमादित्य के गौरवशाली इतिहास पर आधारित सवालों के जवाब देते हुए छतरपुर की टीम (80 अंक) शीर्ष पर रही। एमपीआईएसएसआर सभागार में शास्त्रीय वादन (नॉनपरकुशन) के माध्यम से 12 विश्वविद्यालयों के स्वर-साधकों ने भागीदारी की।

प्रतियोगिताओं के समापन पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि अभ्युदय ने सिद्ध कर दिया कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के पुनर्निर्माण का सशक्त माध्यम है।

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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल