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जोधपुर, 30 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि चिनाब-अंजीखाड़ रेल पुल भारत की इंजीनियरिंग क्षमता के प्रतीक हैं। आर्च डिजाइन में बना चिनाब पुल और पहला केबल-स्टे पुल अंजीखाड़ कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों को सहन करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
शनिवार को एमबीएम विश्वविद्यालय में चिनाब रेल पुल और अंजीखाड़ पुल पर आयोजित व्याख्यान में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चिनाब रेल पुल का निर्माण दो हजार के दशक में शुरू हुआ, लेकिन सुरक्षा कारणों से रोका गया। बाद में इसे मजबूत डिजाइन और आधुनिक तकनीक से फिर शुरू किया गया। करीब 1,486 करोड़ की लागत से बने इस पुल का निर्माण अगस्त 2022 में पूरा हुआ और सुरक्षा परीक्षणों के बाद इसे इस वर्ष छह जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि 1,315 मीटर लंबा और 359 मीटर ऊंचा यह पुल आज दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल है।
यह भूकंप, भूस्खलन और 266 किमी प्रति घंटे तक की हवाओं को सहन करने में सक्षम है। वहीं अंजी खड्ड पुल, जो 331 मीटर ऊंचा और 750 मीटर लंबा है, 2023 में पूरा हुआ और 2024 में सफल परीक्षणों के बाद 2025 में औपचारिक रूप से शुरू किया गया। चमकते केबल्स के साथ हिमालय की पृष्ठभूमि में यह पुल भारतीय इंजीनियरिंग कौशल की चमक बिखेरता है। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. अजय शर्मा, आयोजन सचिव प्रोफेसर एएन मोदी, अशोक कुमार माथुर कार्यक्रम में विशेष रूप से मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश