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जयपुर, 30 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान में एसआई भर्ती परीक्षा पर हाईकोर्ट के हालिया फैसले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार और भाजपा पर तीखा पलटवार किया है। गहलोत ने कहा कि अदालत के निर्णय ने भाजपा के दोहरे चरित्र को उजागर कर दिया है। भाजपा सार्वजनिक रूप से कुछ और कहती है, जबकि अदालत में दायर हलफनामे में एसआई भर्ती परीक्षा रद्द न करने की बात रखती है।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा और सांसद हनुमान बेनीवाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं जैसे संवेदनशील विषय पर नेताओं का टीवी डिबेट में आपसी आरोप-प्रत्यारोप जनता के बीच गलत संदेश देता है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के संदर्भ में गहलोत ने कहा कि हम सब इंतजार कर रहे हैं कि वह राजस्थान कब आएंगे। हम उनका स्वागत करेंगे और कारणों पर उनसे बातचीत करेंगे।
गहलोत ने याद दिलाया कि उनके कार्यकाल में रीट परीक्षा का पेपर लीक होने पर सरकार ने पूरी परीक्षा रद्द करके दोबारा आयोजित करवाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक माफिया पर नकेल कसने के लिए उम्रकैद तक की सजा, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, संपत्ति कुर्क करने और एसओजी में एंटी-चीटिंग सेल गठित करने जैसे कड़े कदम उठाए। उनके अनुसार, इन्हीं सख्त प्रावधानों के चलते कई मामले उजागर हुए और “ऐसे कामों में संलिप्त सैकड़ों लोगों को जेल भेजा गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जिन नामों का जिक्र हो रहा है, उनमें आरपीएससी के कुछ सदस्य भी शामिल हैं। गहलोत ने कहा कि तीन आरपीएससी मेंबर जो वसुंधरा राजे के समय नियुक्त हुए थे के नाम सामने आए हैं। जिन दो लोगों को पकड़ा गया, उनमें से एक की नियुक्ति भाजपा सरकार के दौरान हुई थी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि पेपर लीक न हो, यह कैसे सुनिश्चित हो इस दिशा में पक्ष–विपक्ष मिलकर काम करें। गहलोत ने कहा कि बेरोजगारी और व्यापक प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रकृति के कारण देशभर में पेपर लीक की घटनाएँ बढ़ी हैं। आर्मी, न्यायिक सेवाएँ, मेडिकल (नीट) सहित कई भर्ती/प्रवेश परीक्षाओं में लीक के आरोप सामने आए और उत्त्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब, पश्चिम बंगाल समेत अनेक राज्यों में 50 से अधिक मामलों की चर्चा रही।
गहलोत ने दावा किया कि पेपर लीक विरोधी कठोर कानून सबसे पहले पिछली कांग्रेस सरकार ने राजस्थान में बनाया—जिसमें सजा को पहले 10 वर्ष और बाद में उम्रकैद तक बढ़ाने, भारी जुर्माने और संपत्ति कुर्की जैसे प्रावधान शामिल किए गए। उनके मुताबिक, इसके बाद केंद्र सरकार ने भी कानून बनाया, पर सजा का प्रावधान कम रखा गया।
साल 2021 में पूर्व आईपीएस और आरपीएससी के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र कुमावत की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई, जिसने परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और मज़बूत बनाने के सुझाव दिए। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर कई सुधार लागू किए गए। गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान जहाँ भी गड़बड़ी मिली, अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ परीक्षा रद्द कराई गई। उन्होंने उदाहरण दिया कि आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा को भी कांग्रेस सरकार के समय पद पर रहते हुए गिरफ्तार किया गया, ताकि यह संदेश जाए कि “आरोपी किसी भी स्तर का हो, बख्शा नहीं जाएगा।
रीट लेवल-2 में अनियमितताएँ सामने आने पर परीक्षा रद्द करने और समयबद्ध ढंग से पुनर्परीक्षा कराने का भी उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि पदों की संख्या 32 हजार से बढ़ाकर 50 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति दी गई। एसओजी ने तब बताया था कि पेपर कुछ 70–80 लोगों तक पहुँचा था, फिर भी जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए हमने सख्त निर्णय लिया।
गहलोत ने कहा कि मुद्दा राजनीतिक लाभ-हानि का नहीं, बल्कि योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित रखने का है। उन्होंने सरकार और विपक्ष, दोनों से अपील की कि भर्ती परीक्षाएँ नकल/लीक–मुक्त हों, इसके लिए समन्वित और संस्थागत समाधान पर मिलकर काम किया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक