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गांधीनगर, 23 जून (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ने सोमवार कोे 14वें दीक्षांत समारोह में अब तक के सबसे बड़े ग्रेजुएटिंग बैच का जश्न मनाया। महात्मा मंदिर कन्वेंशन एंड एग्ज़िबिशन सेंटर में कुल 668 विद्यार्थियों को विभिन्न डिग्रियां प्रदान की गईं। इस वर्ष संस्थान ने 111 पीएचडी डिग्रियां देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
आईआईटी की निदेशक प्रो. रजत मूना ने कहा कि पिछला शैक्षणिक वर्ष संस्थान के लिए गहन परिवर्तन और विस्तार का वर्ष रहा। इस दौरान एकीकृत सर्किट डिजाइन और प्रौद्योगिकी में एक नया बीटेक प्रोग्राम शुरू किया गया। साथ ही एक प्रमुख पाठ्यक्रम सुधार भी किया गया, जिसके अंतर्गत बीटेक छात्र अपने सातवें सेमेस्टर में कैंपस से बाहर रहकर इंटर्नशिप, अनुसंधान परियोजनाओं, उद्यमशीलता प्रयासों या शैक्षणिक सहयोग में भाग ले सकते हैं। इस साल ऊर्जा नीति और विनियमन तथा निर्णय लेने के लिए डेटा विज्ञान में दो सफल ई-मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम संचालित किए। अगस्त में इंजीनियरिंग में मशीन लर्निंग के अनुप्रयोग विषय पर एक नया ई-मास्टर्स शुरू किया जाएगा।
दीक्षांत समारोह पर मुख्य अतिथि के रूप में आकासा एयर के सह-संस्थापक आदित्य घोष उपस्थित थे। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि दीक्षांत समारोह केवल वर्षों की मेहनत का समापन नहीं है, बल्कि यह जीवनभर सीखने, विकास करने और सार्थक प्रभाव छोड़ने की यात्रा की शुरुआत भी है। उन्होंने कहा कि हमारा सबसे बड़ा मूल्यांकनकर्ता वही व्यक्ति है, जो हमें आईने में देखता है। इस विचार के माध्यम से उन्होंने आत्म-चिंतन और आंतरिक ज़िम्मेदारी की महत्ता पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्नातकों से आग्रह किया कि वे उद्देश्यपूर्ण, ईमानदार और निरंतर आत्म-सुधार पर आधारित जीवन जिएं, और सफलता को धन या पद से नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में डाले गए सकारात्मक प्रभाव से मापें।
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हिन्दुस्थान समाचार / Abhishek Barad