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जोधपुर, 02 सितम्बर (हि.स.)। खेरादियों का बास स्थित राजेन्द्र भवन में पर्युषण पर्व की आराधना से पूर्व साध्वी रत्नरेखा, अनुभवदृष्टा एवं कल्पदर्शिता श्रीजी महाराज की पावन निश्रा में प्रतिक्रमण की प्रत्येक क्रिया को सरल एवं व्यावहारिक रूप से समझाते हुए बताया जा रहा है कि कौन-से सूत्र पर कौन-सी क्रिया करनी है, कब बैठना है, कब खड़े होना है, खमासणा किस प्रकार देना है, दायां एवं बायां पैर किस क्रम से उठाना-रखना है तथा मुहपत्ती किस प्रकार व्यवस्थित करनी है। साथ ही प्रतिक्रमण के पाठों के उच्चारण एवं क्रियाओं के सही क्रम की जानकारी दी जा रही है।
इस अवसर पर उन्होंने बताया कि पूरे वर्ष में पर्युषण पर्व के आठ दिन श्रद्धा एवं आराधना के दिन हैं। इस अवधि में 17 प्रतिक्रमण अवश्य करने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिक्रमण केवल पाठ करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि दिन भर में हुए जाने-अनजाने दोषों का चिंतन कर उनसे निवृत्ति, क्षमा एवं संयममय जीवन का संकल्प लेने की साधना है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने आचरण का निरीक्षण करते हुए आत्मा को निर्मल बनाने की दिशा में आगे बढ़ता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में गौतम खिवसरा, अशोक संखलेचा, गौतम सिंघवी, हुक्मीचंद ललित सालेचा, विनोद जीवन रमेश भंडारी, अंजू मूथा, चंदन सेठ, लीला सुराणा, सावित्री पोरवाल, कमला, शांति, देवी, पानी देवी, नीलम, चम्पा वीना भंडारी, विमला मेहता एवं आशा जैन सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। प्रवचन की समाप्ति पर आरती का लाभ जितेन्द्र, भूपेन्द्र, महेन्द्र एवं धर्मेन्द्र वेदमुथा परिवार को प्राप्त हुआ।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश