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शिमला, 05 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के सरकारी सीबीएसई स्कूलों में मेरिट इन-सर्विस शिक्षकों की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर अभिभावकों ने सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि मेरिट सूची जारी हुए तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। इससे कई स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों की तैयारी पर भी इसका असर पड़ रहा है।
अभिभावकों ने कहा कि सरकार ने मेरिट के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति कर सरकारी सीबीएसई स्कूलों में बेहतर शिक्षा देने का भरोसा दिया था। इसी विश्वास के आधार पर कई परिवारों ने अपने बच्चों का दाखिला इन स्कूलों में कराया। अब शैक्षणिक सत्र का बड़ा हिस्सा बीतने के बाद भी कई विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई और विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है।
अभिभावकों के अनुसार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुजानपुर और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जवाली में अभी भी भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान के प्रवक्ताओं के पद खाली हैं। उनका कहना है कि विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों को इसका सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। मेरिट सूची जारी हुए 90 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
अभिभावकों ने सरकार से अगले 10 दिनों के भीतर मेरिट इन-सर्विस शिक्षकों की काउंसलिंग शुरू कर सभी रिक्त पद भरने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। इस मांग का समर्थन कर्तार चंद, सपना देवी, सुमन राणा, कुसुम और सरिता देवी सहित कांगड़ा जिले के विभिन्न सरकारी सीबीएसई स्कूलों के अभिभावकों ने किया है। उनका कहना है कि सरकार को विद्यार्थियों के हित को देखते हुए नियुक्तियों में अब और देरी नहीं करनी चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा