गीता और रामचरितमानस का अध्ययन कर स्वयं के साथ करें राष्ट्र निर्माण : डॉ. उमेश पालीवाल
कानपुर, 19 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्र निर्माण के लिए सबसे पहले स्वयं का निर्माण जरूरी है। इसके लिए युवाओं और भावी पीढ़ी को श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र से प्रेरणा लेकर गीता और रामचरितमानस का अध्ययन करना चाहिए और उनके संदेशों को जीवन में उतारना

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