कच्छ चर्म शिल्प के शिल्पाचार्य अंचल पी. बिजलानी को सीएसजेएमयू ने दी डी.लिट् की मानद उपाधि
कानपुर, 09 जुलाई (हि.स.)। पारंपरिक हस्तशिल्प केवल कला नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव है। शिक्षा और तकनीक के माध्यम से पारंपरिक हुनर को नई पहचान देकर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाया जा सकता है। यह बातें

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