हरिद्वार के सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली पर हाई कोर्ट सख्त, दो सप्ताह में मांगा जवाब
नैनीताल, 22 जुलाई (हि.स.)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हरिद्वार में जिला न्यायालय, जिला अधिकारी कार्यालय, तहसील, एसएसपी कार्यालय सहित अन्य सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक शौचालयों की बदहाल स्थिति से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला अधिकार
हरिद्वार के सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली पर हाई कोर्ट सख्त, दो सप्ताह में मांगा जवाब


नैनीताल, 22 जुलाई (हि.स.)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हरिद्वार में जिला न्यायालय, जिला अधिकारी कार्यालय, तहसील, एसएसपी कार्यालय सहित अन्य सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक शौचालयों की बदहाल स्थिति से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला अधिकारी हरिद्वार, राज्य सरकार और उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 अगस्त की तिथि नियत की है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जिला अधिकारी हरिद्वार से यह भी पूछा है कि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों का कितना पालन किया गया है।

मामले के अनुसार, नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट हरिद्वार के कृष्ण कांत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उनके द्वारा दो बार कोर्ट परिसर, जिला अधिकारी कार्यालय, एसएसपी कार्यालय, तहसील परिसर सहित कई अन्य कार्यालयों व सार्वजनिक शौचालयों का निरीक्षण किया गया, लेकिन उनकी बुरी स्थिति दिखी। याचिका में कहा कि जो ठीक ठाक स्थिति में थे उनमें ताला लगा हुआ पाया गया। शोचालायों की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वहां आने वाले लोगों व कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। शौचालय की ठीक व्यवस्था न होने के कारण लोग खुले मे शौच करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। जबकि इस संबंध मे सर्वोच्च न्यायालय ने जनवरी 2025 मे राजीव कलिटा बनाम केंद्र सरकार में सभी राज्यों को दिशा निर्देश दिए थे कि इन जगहों पर पर्याप्त सुलभ शौचालयों की सुविधा उपलब्ध हों। निर्देशों मे कहा था कि पर्याप्त सुलभ शौचालय न होना समानता के अधिकार को कमजोर बनाता है। शौचालयों मे बिजली, पानी की उचित व्यवस्था हो, नियमित सफाई हों, चालू फ्लस की व्यवस्था हों, पर्यावरण के अनुकूल शौचालय बनाने पर विचार किया जाए, साबुन, नैपकिन, टॉयलेट पेपर सहित अन्य की व्यवस्था हो। इनकी समस्या समय पर जांच करने के लिए कमेटी का गठन किया जाए। लेकिन अभी तक न तो निर्देशों का अनुपालन हुआ न ही शौचालयों की साफ सफाई हो रही। कोर्ट से प्रार्थना की गई कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन करवाया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / लता