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- जनजातीय बालिकाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम बनेगा शबरी वाचनालय : राज्यपाल डेका
रायपुर, 21 जुलाई (हि.स.)। वनवासी विकास समिति, रायपुर (छत्तीसगढ़) द्वारा स्थापित नया प्रकल्प “शबरी वाचनालय” मंगलवार को शबरी कन्या आश्रम परिसर, रोहिणीपुरम, रायपुर में भव्य रूप से उद्घाटन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका थे, जिन्होंने वाचनालय का उद्घाटन कर इस पहल को राज्य और जनजातीय संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण बताया। समारोह की अध्यक्षता वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष उमेश कच्छप ने की। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय संगठन मंत्री अतुल जोग मुख्य वक्ता रहे। पूरे कार्यक्रम का संचालन राजीव शर्मा ने किया।
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और वाचनालय उद्घाटन से हुई। शबरी कन्या आश्रम की छात्राओं ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया तथा “राष्ट्र विजयी हो हमारा” एकल गीत प्रस्तुत किया।
अनुराग जैन ने वनवासी विकास समिति एवं वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज उत्थान के क्षेत्र में चलाई जा रही पहलों का संक्षेप में परिचय दिया, जिसमें पूर्वोत्तर भारत की बालिकाओं के छात्रावास, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ और शैक्षिक प्रकल्प शामिल हैं।
अखिल भारतीय संगठन मंत्री अतुल जोग ने कहा कि, वनवासी कल्याण आश्रम 1952 में जशपुर से प्रारम्भ हुआ था। उन्होंने औपनिवेशिक मिथ्याप्रचारों को चुनौती दी और बताया कि जनजातीय समाज पारस्परिक सहयोग, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण है। श्री जोग ने आश्रम से निकली अनेक बालिकाओं के डॉक्टर, प्रोफेसर, तहसीलदार, पुलिस अधिकारी, सेना और महिला कमांडो के रूप में देश सेवा में योगदान का उल्लेख किया।
इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने शबरी आश्रम में शिक्षा के साथ नैतिक मूल्य और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने की प्रशंसा की और नागरिकों से समाजहित में कम-से-कम एक रचनात्मक कार्य करने का आग्रह किया।
राज्यपाल ने कहा कि, शबरी वाचनालय एक दूरदर्शी पहल है, जो जनजातीय बालिकाओं के लिए अध्ययन, चिंतन, आत्मविकास एवं व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त केंद्र बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां अध्ययन करने वाली बालिकाएं ज्ञान एवं शिक्षा के बल पर प्रतियोगी परीक्षाओं सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करेंगी। उनकी उपलब्धियां न केवल उनके परिवार, बल्कि समाज और राष्ट्र का गौरव भी बढ़ाएंगी। उन्होंने जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों एवं वीरांगनाओं—विशेषकर रानी दुर्गावती—के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का आह्वान किया।
राज्यपाल डेका ने कहा कि, अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम से संबद्ध वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ प्रांत विगत कई दशकों से जनजातीय समाज के उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, स्वावलंबन एवं सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने का यह प्रयास वास्तव में प्रेरणादायी है। उन्होंने संस्था के संस्थापकों, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों के समर्पण भाव की सराहना करते हुए उनके सेवा कार्यों की प्रशंसा की।
कार्यक्रम के अंत में वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष उमेश कच्छप ने राज्यपाल, मुख्य वक्ता, उपस्थित अतिथियों और सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। वाचनालय की स्थापना के लिए राज्यपाल द्वारा अपने स्वेच्छानुदान मद से आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गायत्री प्रसाद धीवर