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--आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ अपील खारिज
प्रयागराज, 08 जून (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 1983 में सुनाए गए एक हत्या के मामले में दोष-सिद्धि व उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए अभियुक्तों की अपील खारिज कर दी।
10 अगस्त, 1982 को शाम करीब 6 बजे सहारनपुर जिले के कनखल इलाके में सतीश कुमार नामक युवक पर सात लोगों ने गुप्ती, चाकू, चेन और देशी पिस्तौल से हमला कर दिया। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में शरीर पर कुल 15 घाव पाए गए।
सत्र न्यायालय ने 17 नवंबर, 1983 को सतीश, शिव कुमार, अशोक, भूपत, राकेश, विजय और विक्रम को दोषी करार देते हुए धारा 302/149 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने तीनों आपराधिक अपीलें खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। अपील के दौरान आरोपी राकेश की मृत्यु हो जाने से उसके विरुद्ध कार्यवाही पहले ही समाप्त हो चुकी थी।
अदालत ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों नाथीराम और श्रीराम की गवाही पूरी तरह विश्वसनीय है और चिकित्सीय साक्ष्यों से इसकी पुष्टि होती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे