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कोलकाता, 03 जून (हि.स.)। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि कोलकाता नगर निगम की अध्यक्ष माला राय नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार मासिक बैठक बुला सकती हैं। न्यायालय के इस आदेश को राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही अटकलों के बीच अहम माना जा रहा है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने कहा कि नगर निगम की अध्यक्ष को कानून के तहत मासिक बैठक बुलाने का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि 22 मई को आयोजित बैठक में पारित प्रस्तावों की प्रति शपथपत्र के रूप में 9 जून तक न्यायालय में जमा कराई जाए। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी।
यह मामला तब अदालत पहुंचा था जब आरोप लगाया गया कि अध्यक्ष द्वारा बैठक बुलाए जाने के बावजूद नगर निगम की नियमित मासिक बैठक आयोजित नहीं हो सकी। इसके बाद इस संबंध में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।
गौरतलब है कि, राज्य में सरकार बदलने के बाद कोलकाता नगर निगम को भंग किए जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। ऐसे माहौल में उच्च न्यायालय का यह फैसला विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इससे नगर निगम की नियमित प्रशासनिक गतिविधियों को जारी रखने का रास्ता साफ हुआ है।
सरकार परिवर्तन के बाद मेयर-इन-काउंसिल की बैठक रद्द कर दी गई थी और नगर निगम की मासिक बैठकों को भी स्थगित करने का निर्देश दिया गया था। इसी दौरान राज्य सरकार ने कोलकाता नगर निगम के सचिव को भी बदल दिया था।
22 मई को नगर निगम मुख्यालय में एक असामान्य स्थिति पैदा हो गई थी। अध्यक्ष माला राय द्वारा बैठक बुलाए जाने के बावजूद बैठक कक्ष बंद पाया गया। बैठक में भाग लेने पहुंचे तृणमूल कांग्रेस के पार्षद कक्ष में प्रवेश नहीं कर सके। इसके बाद माला राय ने बैठक कक्ष के बाहर ही पार्षदों के साथ चर्चा की थी।
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ने इसे नगर निगम के इतिहास का “काला दिन” बताया था। उन्होंने राज्य सरकार से टकराव की राजनीति से बचने और शहरवासियों के हित में काम करने की अपील की थी। इसके बाद ही यह मामला उच्च न्यायालय पहुंचा।
उच्च न्यायालय के ताजा आदेश के बाद कोलकाता नगर निगम की नियमित बैठकों के आयोजन को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक दूर होती दिखाई दे रही है। ----------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर