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धमतरी, 03 जून (हि.स.)। मध्यप्रदेश के राजकीय पक्षी दूधराज उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के विभिन्न वन क्षेत्रों में लगातार नजर आ रहे हैं, जो रिजर्व की समृद्ध जैव विविधता एवं स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का एक सकारात्मक संकेत है। यह पक्षी अद्भुत सुंदरता, लंबी पूंछ और आकर्षक उड़ान के लिए प्रसिद्ध है, जो अब रिजर्व के वनों, नदी तटीय क्षेत्रों एवं वृक्षाच्छादित आवासों में नियमित रूप से देखा जा रहा है।
दूधराज भारत के सबसे सुंदर पक्षियों में से एक माना जाता है। वयस्क नर पक्षी अपने चमकदार सफेद शरीर और अत्यंत लंबी रेशमी पूंछ के कारण आसानी से पहचाना जाता है, जबकि मादा एवं युवा पक्षियों का रंग लाल-भूरा होता है। इसकी मनमोहक उड़ान और मधुर स्वर प्रकृति प्रेमियों एवं पक्षी पर्यवेक्षकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। दूधराज मुख्यतः नम पर्णपाती वनों, मिश्रित वनों, बांस क्षेत्रों, नदी-नालों के किनारे स्थित हरित पट्टियों तथा घने वृक्षावरण वाले क्षेत्रों में निवास करता है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में उपलब्ध विविध वन आवास इस पक्षी के भोजन, प्रजनन एवं घोंसला निर्माण के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान करते हैं। रिजर्व क्षेत्र में यह पक्षी प्रायः जलस्रोतों, वन मार्गों, वन ग्रामों के आसपास तथा घने वृक्षों वाले क्षेत्रों में देखा जाता है। इसकी नियमित उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि रिजर्व के वन क्षेत्र अभी भी उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक आवास उपलब्ध करा रहे हैं। दूधराज एक महत्वपूर्ण कीटभक्षी पक्षी है। यह मुख्य रूप से मक्खियों, पतंगों, भृंगों, दीमकों तथा अन्य उड़ने वाले कीटों का भोजन करता है। इस प्रकार यह प्राकृतिक रूप से कीटों की संख्या को नियंत्रित कर वन पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह किसी शाखा पर शांत बैठकर आसपास की गतिविधियों पर नजर रखता है और जैसे ही कोई उड़ता हुआ कीट दिखाई देता है, तुरंत हवा में उड़ान भरकर उसे पकड़ लेता है। शिकार करने के बाद यह पुनः उसी शाखा पर लौट आता है। प्रजनन काल के दौरान नर एवं मादा दोनों मिलकर घोंसला बनाते हैं तथा बच्चों की देखभाल करते हैं। इनका घोंसला घास, वृक्षों की छाल के रेशों, मकड़ी के जालों एवं अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से बना एक सुंदर कपनुमा ढाँचा होता है, जिसे पतली शाखाओं पर बनाया जाता है।
संरक्षण का महत्व:
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दूधराज के लगातार बढ़ते अवलोकन यह दर्शाता है कि वन संरक्षण, नदी तटीय आवासों की सुरक्षा तथा क्षतिग्रस्त वनों के पुनस्थापन के प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। स्वस्थ एवं संरक्षित वन क्षेत्र न केवल बाघ, तेंदुआ एवं अन्य बड़े वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पक्षियों, कीटों और छोटे जीवों के संरक्षण में भी समान रूप से योगदान देते हैं।
उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि दूधराज की नियमित उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व मध्य भारत के महत्वपूर्ण जैव विविधता केंद्रों में से एक के रूप में उभर रहा है। यह रिजर्व अनेक दुर्लभ एवं आकर्षक पक्षी प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराकर क्षेत्रीय पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत कर रहा है। मध्यप्रदेश के राजकीय पक्षी दूधराज के लगातार दर्शन उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बेहतर होते वन आवासों और समृद्ध जैव विविधता के स्पष्ट संकेत हैं। यह पक्षी हमें याद दिलाता है कि सफल संरक्षण केवल बड़े वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ पहुंचाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा