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जयपुर, 03 जून (हि.स.)। जयपुर मेट्रो की एमएसीटी मामलों की विशेष कोर्ट ने रोडवेज प्रशासन की लापरवाही से बसों का सही मेंटेनेंस नहीं होने व घिसे टायर्स पर इन्हें चलाने को गंभीर माना है। वहीं बस के घिसे टायर फटने से एक यात्री के पैर काटने पर रोडवेज प्रशासन व चालक को संयुक्त तौर पर जिम्मेदार माना है। कोर्ट ने रोडवेज को निर्देश दिया है कि वे प्रार्थी को 17,06,457 की क्षतिपूर्ति 6 फीसदी ब्याज सहित दें। कोर्ट ने यह आदेश जगतपुरा निवासी सुरेश कुमार गोडीवाल की क्लेम याचिका पर दिया।
अधिवक्ता मनीष जैन ने बताया कि 28 मई 2022 को प्रार्थी सुरेश कुमार अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रोडवेज की बस में बैठकर जयपुर से कांवट जा रहे थे। सुबह करीब 11:30 बजे बडिया की चौकी के पास अचानक तेज धमाके के साथ बस के पीछे का टायर फट गया। टायर पुराना व घिसा हुआ था व उसकी रबड़ उखड़ चुकी थी। टायर फटने के दबाव से बस के फर्श की लोहे की चद्दर फट गई। सुरेश कुमार, टायर के ठीक ऊपर वाली सीट पर बैठे थे, इसलिए लोहे के टुकड़े और चद्दर उनके पैरों में जा घुसे। इससे वे गंभीर घायल हो गए और उसे 17 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। वहां पर जहां उसके कई ऑपरेशन हुए व रॉड डाली गई। लेकिन संक्रमण के कारण उसका पैर काटना पड़ा। सुनवाई के दौरान रोडवेज प्रशासन ने जवाब में कहा कि यह अपरिहार्य दुर्घटना थी और चालक की लापरवाही नहीं थी। लेकिन चालक महेंद्र कुमार शर्मा ने माना कि बस के टायरों का रोडवेज सही रख-रखाव नहीं करता है। इसके चलते ही टायर फटा और फर्श टूटने से यात्री को चोट आई।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक