50 साल से अधिक उम्र की महिला को बच्चा पैदा करने के लिए उसके फ्रीज कराए जा चुके भ्रूण का उपयोग करने की अनुमति
नई दिल्ली, 03 जून (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 50 साल से ज्यादा की उम्र की महिला को बच्चा पैदा करने के लिए उसके फ्रीज कराए जा चुके भ्रूण का उपयोग करने की अनुमति दे दी है। जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव की बेंच ने कहा कि महिला की आयु सीमा पूरी हो चुकी ह
50 साल से अधिक उम्र की महिला को बच्चा पैदा करने के लिए उसके फ्रीज कराए जा चुके भ्रूण का उपयोग करने की अनुमति


नई दिल्ली, 03 जून (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 50 साल से ज्यादा की उम्र की महिला को बच्चा पैदा करने के लिए उसके फ्रीज कराए जा चुके भ्रूण का उपयोग करने की अनुमति दे दी है। जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव की बेंच ने कहा कि महिला की आयु सीमा पूरी हो चुकी है, लेकिन प्रजनन के उसके अधिकार को कानून की तकनीकी शर्तों में आड़े नहीं आने दिया जा सकता है।

दरसअल 2025 में महिला के बेटे की मौत हो गई थी। उसके बाद महिला और उसके पति ने आईवीएफ तकनीक से गर्भधारण करने की योजना बनाई। महिला ने गर्भधारण के लिए एक बार आईवीएफ तकनीक अपनाया भी, लेकिन वो सफल नहीं हो सका। उसके बाद डॉक्टरों ने कहा कि उसे अपने बचे हुए भ्रूण का इस्तेमाल करें, लेकिन अस्पताल ने ये कहते हुए इस तरीके से गर्भधारण कराने से इनकार कर दिया कि कानून के मुताबिक महिला की उम्र 50 साल से ज्यादा हो चुकी है।

दरअसल, असिस्टेट रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी रेगुलेशन (एआरटी) कानून के तहत किसी महिला की उम्र 21 साल से 50 साल के बीच होनी चाहिए जबकि पुरुष की उम्र 21 वर्ष से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि भ्रूण निकाले जाने के समय महिला की उम्र 49 साल, 11 महीने और 14 दिन थी और महिला और उसका पति नए भ्रूण निकलवाने की नहीं बल्कि उन भ्रूण का इस्तेमाल करने की मांग कर रहा था जिन्हें तब निकाला गया था जब वे कानूनी उम्र की शर्त पूरी करते थे।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रभात मिश्रा