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मुरादाबाद, 13 जून (हि.स.)। आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों के पंजीकरण के नियम अब और सख्त कर दिए गए हैं। नए प्रावधानों के अनुसार मुरादाबाद में अब 50 बेड से कम क्षमता वाले निजी अस्पताल आयुष्मान योजना में शामिल नहीं हो सकेंगे। अस्पतालों के लिए एनएबीएच (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) का प्रमाणपत्र होना भी जरूरी कर दिया गया है।
मुरादाबाद में वर्तमान में 107 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से जुड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग को जारी पत्र में स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) का कहना है कि जिले में आयुष्मान से संबद्ध अस्पतालों की संख्या आबादी के हिसाब से पर्याप्त है, इसलिए यहां नए अस्पतालों के लिए यह सख्त मानक लागू किए गए हैं। यह व्यवस्था मुरादाबाद समेत प्रदेश के 10 जिलों में लागू की गई है।
अब आयुष्मान योजना में शामिल होने के लिए आवेदन करने वाले अस्पतालों को कम से कम 50 बेड की सुविधा और निर्धारित गुणवत्ता के मानकों को पूरा करना होगा। ऐसा न होने पर उनके आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। साचीज ने पहले से योजना में शामिल अस्पतालों को राहत के साथ चेतावनी भी दी है। पंजीकृत अस्पतालों को छह महीने के भीतर एनएबीएच प्रमाणपत्र जमा करना होगा। तय समय में प्रमाणन नहीं मिलने पर उनका अनुबंध समाप्त कर उन्हें आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर किया जा सकता है।
नोडल अधिकारी डॉ. आरके शर्मा के अनुसार इस फैसले का मकसद आयुष्मान कार्डधारकों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। योजना से केवल उन्हीं अस्पतालों को जोड़ा जाएगा, जिनके पास पर्याप्त संसाधन, प्रशिक्षित स्टाफ और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल