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नई दिल्ली, 08 मई (हि.स)। सर रतन टाटा ट्रस्ट की शुक्रवार को प्रस्तावित बोर्ड की बैठक बिना कारण बताये रद्द कर दी गई है। बोर्ड की अगली बैठक की नई तारीख अभी तय नहीं की गई है। ट्रस्ट की प्रस्तावित बैठक में टाटा ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को टाटा सन्स निदेशक मंडल में पुनः नामित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी थी। इस मामले से जुड़े लोगों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी है।
टाटा ट्रस्ट से इस संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए प्रयास किया गया लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा, ‘‘बैठक नहीं हुई। इसका कोई कारण नहीं बताया गया।’’
टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा और वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन वर्तमान में टाटा सन्स के निदेशक मंडल में हैं। पिछले साल पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह ने टाटा सन्स बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था। दो न्यासी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की सार्वजनिक रूप से टाटा सन्स को सूचीबद्ध करने की सिफारिश और नोएल टाटा के इसका विरोध करने की पृष्ठभूमि में शुक्रवार की यह बैठक होने वाली थी।
टाटा ट्रस्ट के पास टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स में 23.6 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसका आकार 180 अरब डॉलर से अधिक है। टाटा ट्रस्ट के तहत आने वाले परमार्थ संस्थानों के न्यासियों के बीच यह मतभेद पिछले साल सामने आया था। न्यासियों की टाटा सन्स में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
इससे पहले इसी साल जनवरी में भी सर रतन टाटा ट्रस्ट की प्रस्तावित निदेशक मंडल की बैठक सदस्यों की न्यूनतम मौजूदगी के अभाव में रद्द कर दी गई थी। इसमें नोएल टाटा के पुत्र नेविल टाटा को न्यासी नियुक्त करने पर विचार होना था।
गौरतलब है कि इससे पहले एक याचिका में इस बैठक को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि ट्रस्ट के मौजूदा निदेशक मंडल की संरचना महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत तय सीमा का उल्लंघन करती है।
रतन टाटा ट्रस्ट में फिलहाल छह न्यासी हैं, जिनमें से तीन जिमी नवल टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और नोएल नवल टाटा आजीवन न्यासी हैं। यह कुल निदेशक मंडल का 50 फीसदी बनता है, जबकि कानूनी सीमा 25 फीसदी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर