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कोलकाता, 29 मई (हि.स.)। जीवनकाल में निर्देशक अनीक दत्ता को नंदन में अपनी फिल्मों के प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली थी। शुक्रवार 29 मई को जीवन की अंतिम यात्रा में वही नंदन उनके पार्थिव शरीर का साक्षी बना। फूलों से सजे कांच के शववाहन में अनीक दत्ता का पार्थिव शरीर नंदन परिसर पहुंचा, जहां उपस्थित सभी लोगों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनकी बेटी राय भी मौजूद थीं। इस दौरान भाजपा विधायक और अभिनेता
रुद्रनील घोष ने कहा कि पूर्व सरकार के समय जिन फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगाई गई थी, वर्तमान सरकार जल्द ही उन फिल्मों को नंदन में प्रदर्शित करेगी। उन्होंने कहा, “अब योग्यता के आधार पर काम होगा, किसी प्रकार का तानाशाही रवैया नहीं चलेगा।”
‘भूतों का भविष्य’ और ‘अपराजित’ जैसी चर्चित फिल्मों के निर्देशक अनीक दत्ता को अंतिम विदाई देने के लिए बांग्ला फिल्म जगत की कई हस्तियां नंदन परिसर में जुटीं। अभिनेता-विधायक रुद्रनील घोष, पापिया अधिकारी, सृजित मुखर्जी, अंजन दत्त, विदिप्ता चट्टोपाध्याय, लॉकेट चट्टोपाध्याय हित टालीवुड के कई जाने-माने चेहरे वहां उपस्थित रहे। वयोवृद्ध माकपा नेता बिमान बोस भी शव यात्रा में नजर आये।
इस दौरान अभिनेत्री लॉकेट चट्टोपाध्याय ने कहा, “अनीक दा अपनी फिल्मों के जरिए लोगों के मन की बात सामने लाते थे। उनका स्थान कोई नहीं ले सकता। पिछले 15 वर्षों में उनकी फिल्मों को नंदन में दिखाने की अनुमति नहीं दी गई। लेकिन अब ऐसा दोबारा नहीं होगा। कलाकारों का सम्मान उनके काम से होना चाहिए, राजनीति के आधार पर नहीं। लोकतांत्रिक देश में हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है। इसका मतलब यह नहीं कि किसी कलाकार को प्रतिबंधित कर दिया जाए। तृणमूल ने जो ‘बैन कल्चर’ शुरू किया था, वह भाजपा शासन में नहीं होगा।”
अभिनेत्री पापिया अधिकारी ने पूर्व सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अनीक दा यह नहीं देख पाए कि टॉलीवुड अब ‘राहु मुक्त’ हो चुका है। अब नंदन और अन्य प्रेक्षागृहों में हर तरह की फिल्में और डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएंगी। कुछ मूर्ख लोगों के कारण डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन बंद कर दिया गया था। ‘अपराजित’ में भी तो तथ्य थे, लेकिन उसे नंदन में अनुमति नहीं मिली। क्योंकि उन्होंने ‘भूतों का भविष्य’ के जरिए समाज का अंधेरा पक्ष उजागर किया था, इसलिए उन्हें पूर्व सरकार के गुस्से का शिकार होना पड़ा। उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। वे लोग हत्यारे हैं। हत्या सिर्फ चाकू से नहीं होती, मानसिक अत्याचार भी हत्या का एक रूप है।”
अभिनेत्री रूपा गांगुली ने भी बिना नाम लिए पूर्व सरकार को अनीक दत्ता की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “मुझे अनीक पर बहुत गुस्सा आ रहा है। वह इतनी जल्दी क्यों चले गए? कितनी सुंदर फिल्में बनाते थे। उन्हें अभी और काम करना था।”
अनीक दत्ता के पार्थिव शरीर को टॉलीवुड के एनटी-1 स्टूडियो भी ले जाया गया जहां उन्होंने सबसे अधिक काम किया था। वहां दोपहर साढ़े बारह बजे तक श्रद्धांजलि कार्यक्रम अंतिम संस्कार के लिए शवयात्रा रवाना हुई।
अभिनेता जीत ने अनीक दत्ता की आत्मा की शांति की कामना करते हुए कहा, “ऐसी घटना पर क्या कहा जा सकता है।” वहीं वरिष्ठ वामपंथी नेता विमान बसु ने कहा कि अनीक दत्ता जैसे निर्देशक को खोने से फिल्म इंडस्ट्री में गहरा शून्य पैदा हो गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय