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नई दिल्ली, 08 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने संदिग्ध आतंकी मसरत आलम भट्ट की जेल में अपने परिवार से फोन पर बात करने की सुविधा देने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को नोटिस जारी किया है। जस्टिस अनूप जयराम भांभानी की बेंच ने एनआईए को दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 7 मई को करने का आदेश दिया।
आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में मसरत आलम भट्ट साल 2019 से हिरासत में है। मसरत आलम की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से कहा कि याचिकाकर्ता पिछले करीब डेढ़ साल से अपने परिवार के सदस्यों से संपर्क नहीं कर सका है।
दरअसल, जेल प्रशासन सर्कुलर जारी कर कहा कि मकोका, देश के खिलाफ अपराध, आतंकी गतिविधियों के आरोपितों को फोन करने की सुविधा नहीं की जाएगी।
याचिका में कहा गया है कि पहले कैदियों को अपने परिवार के सदस्यों से मिलने को सुविधा मिलती थी, उसे सभी कैदियों के लिए बहाल किया जाए।
मसरत आलम भट्ट के खिलाफ 4 अक्टूबर 2019 को टेरर फंडिंग के मामले में चार्जशीट दाखिल की गई थी। इस चार्जशीट में मसरत आलम भट्ट के अलावा अलगाववादी नेता यासिन मलिक, आसिया अंद्राबी, इंजीनियर रशीद और शब्बीर शाह को आरोपित बनाया गया था। चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 121, 121ए, और 124ए के अलावा गैरकानूनी गतिविधियां निरोधक कानून की धारा 13, 16, 17,18, 20, 38, 39 और 40 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय---------------
हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह