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बिलासपुर, 24 अप्रैल (हि.स.)। बिलासपुर जिले में बढ़ती गर्मी और गहराते जल संकट के बीच प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। ग्रामीण इलाकों को राहत देने के लिए 25 अप्रैल से खूंटाघाट डैम से पानी छोड़ा जाएगा, जिससे सैकड़ों गांवों के सूखते तालाबों में फिर से पानी भर सकेगा।
भीषण गर्मी और लू के प्रकोप ने जिले में जल संकट की स्थिति पैदा कर दी है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पानी की किल्लत महसूस की जा रही है। नदी-नाले पहले ही सूख चुके हैं, जबकि तालाब भी तेजी से सूखने की स्थिति में पहुंच गए हैं। इसका असर न केवल लोगों की दैनिक जरूरतों पर पड़ रहा है, बल्कि पशु-पक्षियों को भी पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
ऐसे हालात को देखते हुए प्रशासन ने खूंटाघाट जलाशय से निस्तारी के लिए पानी छोड़ने का निर्णय लिया है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, 25 अप्रैल की सुबह 11 बजे से डैम के बाएं और दाएं तट की नहरों से पानी छोड़ा जाएगा।
डैम से छोड़े जाने वाले पानी से नहर किनारे बसे 107 गांवों के 211 तालाबों को भरा जाएगा। इससे इन क्षेत्रों में जलस्तर सुधरेगा और ग्रामीणों को गर्मी के दौरान राहत मिलने की उम्मीद है। तालाबों में पानी भरने से निस्तारी, साफ-सफाई और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा।
तालाबों में पानी आने से मवेशियों और अन्य पशु-पक्षियों के लिए भी पीने के पानी की समस्या काफी हद तक कम होगी। वर्तमान में जल स्रोत सूखने के कारण उन्हें दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नहर का पानी केवल निस्तारी कार्यों के लिए ही इस्तेमाल किया जाएगा। जल संसाधन विभाग ने अपने मैदानी अमले को सख्त निर्देश दिए हैं कि पानी का उपयोग केवल तालाब भरने तक सीमित रखा जाए।
यदि कोई व्यक्ति नहर के पानी का उपयोग फसलों की सिंचाई या अन्य कार्यों में करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। खासकर रबी सीजन में धान की सिंचाई के लिए पानी के दुरुपयोग पर विशेष नजर रखी जाएगी।
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता मधु चंद्रा ने बताया कि वर्तमान जल संकट को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि 25 अप्रैल से चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ा जाएगा, ताकि सभी 107 गांवों के 211 तालाबों को भरा जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि विभाग का प्रयास है कि उपलब्ध जल का संतुलित और प्रभावी उपयोग किया जाए, जिससे पूरे गर्मी सीजन में ग्रामीणों को राहत मिल सके। साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे पानी का उपयोग केवल जरूरी कार्यों के लिए ही करें, ताकि सभी क्षेत्रों तक समान रूप से पानी पहुंच सके।
हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय