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तिरुवन्नामलाई, 15 अप्रैल (हि.स.)। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्यभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सभी प्रमुख दलों के नेता और उम्मीदवार चुनाव प्रचार में जुटे हैं, वहीं राष्ट्रीय स्तर के नेता भी राज्य में जनसभाएं कर रहे हैं। इसी बीच तिरुवन्नामलाई जिले से एक अनोखा विरोध सामने आया है, जिसने प्रशासन और राजनीतिक दलों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
दरअसल, तिरुवन्नामलाई जिले के कलासापक्कम विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत किडाम्बालयम गांव के गांधी नगर इलाके के ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। उन्होंने अपने क्षेत्र में बैनर लगाकर स्पष्ट रूप से कहा है कि कोई भी नेता या प्रत्याशी उनके गांव में वोट मांगने न आए।
बैनर में लिखा गया है-“कृपया कोई भी हमारे गांव में वोट मांगने न आए। जब तक हमारी मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होता, हम चुनाव का बहिष्कार करेंगे और जरूरत पड़ने पर अपने मतदाता पहचान पत्र प्रखण्ड कार्यालय में वापस कर देंगे।”
गांधी नगर में करीब 600 से अधिक लोग निवास करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले आठ वर्षों से वे सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। हालात इतने खराब हैं कि आपात स्थिति में एंबुलेंस तक गांव नहीं पहुंच पाती। जहरीले जीव के काटने जैसे मामलों में भी मरीजों को लगभग 15 किलोमीटर दूर अस्पताल तक दोपहिया वाहन से ले जाना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के समाधान की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे नाराज होकर उन्होंने इस बार चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।
बैनर में यह भी उल्लेख किया गया है कि किडाम्बालयम श्मशान से गांधी नगर होते हुए वथियानकोट्टई तक सड़क मरम्मत, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए कई बार आवेदन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है है-जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी?
ग्रामीणों के इस विरोध से इलाके में चर्चा का माहौल है और यह प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV