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पानीपत, 15 अप्रैल (हि.स.)। पानीपत न्यायालय ने पुलिस कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए थाना किला के तत्कालीन थाना प्रभारी व छह अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि मामला संगीन अपराध का है और इसमें पुलिस जांच की आवश्यकता है। कोर्ट के आदेशों पर सभी के खिलाफ किला थाना में केस दर्ज कर लिया गया है।
गांव राजाखेड़ी के राजेश ने अपनेवकील के माध्यम से न्यायालय में एक आपराधिक मामला दायर किया था। राजेश का आरोप था कि तीन अक्टूबर 2025 को उनके चचेरे भाइयों और उनके परिवार के सदस्य मंजीत, वजीर, दर्शन, सीमा और लाली ने दाह, कुल्हाड़ी और डंडों से उन पर जानलेवा हमला किया था। हमले में राजेश के सिर और पैर में गंभीर चोटें आईं थीं, जिसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट और सीटी स्कैन से भी हुई थी। शिकायतकर्ता राजेश ने आरोप लगाए कि जब वह न्याय के लिए किला थाने पहुंचे, तो तत्कालीन एसएचओ निरीक्षक नीरज लाठवाल और जांच अधिकारी एसआई अनूप ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उल्टा राजेश के खिलाफ ही झूठी एफआईआर दर्ज कर दी।
आरोप है कि जांच अधिकारी आरोपियों का दूर का रिश्तेदार है, जिसके कारण पुलिस ने मिलीभगत कर शिकायत को दबा दिया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विकास वर्मा ने पाया कि राजेश द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं। कोर्ट ने कहा कि केस फाइल और मेडिकल दस्तावेजों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि अपराध घटित हुआ है और न्याय के हित में पुलिस को एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच करनी चाहिए थी, लेकिन हुई नहीं।
कोर्ट ने थाना प्रभारी किला को आदेश दिया है कि उपरोक्त दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की गहनता से जांच की जाए और 28 अप्रैल 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाए। थाना किला प्रभारी सुरेश ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर आज उपरोक्त दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल वर्मा