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अररिया, 15 अप्रैल(हि.स.)। बिहार में अररिया जिला के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुंजन पांडेय की अदालत ने बुधवार को हत्याकांड के 15 आरोपियों को आजीवन कारावास के साथ 20 हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई है। अर्थ दंड की अदायगी नहीं करने पर छह महीने तक की अतिरिक्त सजा भुगतने का भी आदेश न्यायालय ने दिया। सजा 28 वर्ष पुराने मामले में सुनाई गई ।
मामला जिले के पलासी थाना कांड संख्या 70/1998 से संबंधित है। इसका सत्रवाद संख्या 70/2004 हैं। सूचक पलासी थाना क्षेत्र के कुमिहया रामनगर टोला के रहने वाले इबनुल हक पिता अब्दुल हमीद हैं। सजा पाने वाले आरोपियों में पलासी थाना क्षेत्र के सुकसेना के मो.हाजी रोजिद,समदानी, फकीर मोहम्मद,रजाबुल, अकलिम,नसीम,ऐनुल, सैजुदिन,इसहाक,मो. तैयब हैं। इसके अलावा डेंगा के अजमल, हसीब, कुद्दूस, कफील क्षेत्र के एवं बैरगाछी के रहने वाले मो.वसीक हैं । न्यायालय ने सभी आरोपियों को भादवि 147, 148,149, 302/34, 379, 323, 341, 307 में दोषी करार दिया ।
सूचक मो इबनुस ने पलासी थाना में 3 मई 1998 को आवेदन दिया था,जिसमें उन्होंने नो लोगों को नामजद आरोपी बनाते हुए अपने फर्द बयान में बताया था कि वह सुबह 8 बजे डेंगा चौक पर चाय पीने के लिए गया हुआ था और एकाएक हरि लाल यादव के कपड़ा दुकान में हल्ला मचा तो वह दौड़कर गया तो नामजद आरोपियों के साथ 30-40 की संख्या में लोग हरि लाल यादव को मार रहे थे। विरोध एवं बचाव करने मो इबनुस के समधी अलीमुद्दीन बचाने गया तो सभी लोग अंधाधुंध दबिया, फरसा, लाठी डंडे से मारपीट करते हुए घटनास्थल पर ही उन्हें मौत का घाट उतार दिया था। फिर लाश ले जाने के क्रम में भी उनलोगों ने बाधा उत्पन्न किया ।
पुलिस द्वारा कुल 21 लोगों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया गया था,जिसमें विचारण के दौरान बाकी आरोपियों की मौत हो गई। सजा पाने वाले अधिकांश दोषी 70 वर्ष के आयु के हैं,जिसमे दोषी हाजी रोजिद सबसे वृद्ध 89 वर्ष के हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में कुल 13 साक्षी का परीक्षण करवाया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से रामानंद मंडल और बचाव के लिए आरोपियों की वरीय अधिवक्ता मंजूर आलम ने न्यायालय के समक्ष दलीलें दी । दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने दोषी को सजा सुनाई।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर