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नई दिल्ली, 08 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) के चीते केपी-2 और केपी-3 के राजस्थान के बारां जिले में पहुंचने संबंधी मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लिया है। तथ्यात्मक स्थिति साफ करते हुए एनटीसीए के अधिकारी ने रविवार को बताया कि केपी-2 को बारां के मांगरोल रेंज में ट्रैक किया गया है, जबकि केपी -3 कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 60–70 किमी की दूरी तय कर बांझ अमली संरक्षण रिज़र्व में पहुंचा है। दोनों चीते पार्वती नदी के दोनों किनारों पर लगभग 6 किमी की दूरी पर हैं।
एनटीसीए के अधिकारी ने बताया कि जीपीएस और रेडियो-कॉलर के माध्यम से दोनों चीतों की चौबीस घंटे निगरानी की जा रही है। इसके लिए अंतर-राज्यीय संयुक्त टीम तैनात है, जिसमें किशनगंज और अंता रेंज से फील्ड टीमें सक्रिय हैं। अधिकारी ने बताया कि परिदृश्य सीमाओं के पार लंबी दूरी तक जाना चीतों का स्वाभाविक क्षेत्रीय व्यवहार है और यह वैज्ञानिक रूप से अच्छी तरह दर्ज है। प्रोजेक्ट चीता कार्ययोजना में कूनो–गांधी सागर मेटापॉपुलेशन परिदृश्य के भीतर अंतर-राज्यीय आवाजाही की संभावना पहले से ही शामिल और अपेक्षित है। यह गतिविधि प्रस्तावित 17,000 वर्ग किमी के कूनो–गांधी सागर अंतर-राज्यीय वन्यजीव कॉरिडोर के महत्व को और मजबूत करती है, जो राजस्थान के सात और मध्य प्रदेश के आठ जिलों में फैला हुआ है।
एनटीसीए दोनों राज्यों के वन विभागों के साथ सक्रिय समन्वय में है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी अद्यतन जानकारी जारी की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से आए चीतों की संतानें जो भारत की धरती पर जन्मी हैं, उन्हें राजस्थान की धरती अपनी टेरिटरी के लिए पसंद आ रही है। ये कूनो की सरहदें लांघकर राजस्थान तक अपना साम्राज्य स्थापित कर रहे हैं। केपी-2 चीते करीब 20 दिन से राजस्थान में हैं, अब दूसरा केपी -3 भी उसकी गंध का पीछा करते हुए राजस्थान के बारां जिले के जंगल में दाखिल हो गया है। दोनों करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर हैं। यह चीता बारां जिले के बांझ आमली इलाके से राजस्थान में प्रवेश किया है। दोनों रामगढ़ बारां के जंगल में डेरा जमाए हैं। यह पांचवी दफा है, जब कूनो के चीते राजस्थान की सीमा में पहुंचे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी