ईसाई से दो साल बाद सरना धर्म में लौटा एक परिवार, परंपरागत रीति से हुआ सामाजिक स्वीकार
पश्चिमी सिंहभूम, 08 मार्च (हि.स.)। पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड के मौजा बुंडू स्थित रेंगो टोला में रविवार को एक परिवार ने अपनी पारंपरिक आस्था सरना धर्म में पुनः वापसी की। लगभग दो वर्ष पहले ईसाई धर्म अपनाने वाला यह परिवार अब हो समाज की मूल
सोंगा केराई


सोंगा केराई


पश्चिमी सिंहभूम, 08 मार्च (हि.स.)। पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड के मौजा बुंडू स्थित रेंगो टोला में रविवार को एक परिवार ने अपनी पारंपरिक आस्था सरना धर्म में पुनः वापसी की। लगभग दो वर्ष पहले ईसाई धर्म अपनाने वाला यह परिवार अब हो समाज की मूल संस्कृति और प्रकृति आधारित आस्था में लौट आया है।

बताया गया कि 28 वर्षीय सोंगा केराई ने अपनी पत्नी 25 वर्षीय सोमवारी कुई, 5 वर्षीय पुत्र सुरेश केराई और 2 वर्षीय पुत्र प्रकाश केराई के साथ गांव के मुंडा, दियुरी और आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों की उपस्थिति में पारंपरिक विधि-विधान के साथ सरना धर्म को फिर से स्वीकार किया।

वापसी के इस कार्यक्रम में गांव के दियुरी जवान अंगरिया ने हो समाज की परंपरा के अनुसार लाल मुर्गा की बलि देकर पूजा-पाठ की शुरुआत कराई। इसके बाद पारंपरिक रीति से परिवार के सभी सदस्यों का ‘जाते-परचि’ यानी शुद्धिकरण संस्कार कराया गया। धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से परिवार को फिर से समाज में स्वीकार किया। अब यह परिवार हो समाज की परंपराओं के अनुसार त्योहारों, जन्म, विवाह और मृत्यु से जुड़े सभी सामाजिक और धार्मिक संस्कारों का पालन करेगा।

ग्रामीणों के अनुसार सोंगा केराई का परिवार करीब दो वर्ष पहले बीमारी से राहत की उम्मीद में ईसाई धर्म की ओर चला गया था और तिम्बरा तथा दुईया स्थित चर्च में नियमित रूप से प्रार्थना करने जाता था।

हालांकि धर्म परिवर्तन के बाद भी उनके जीवन में कोई विशेष बदलाव नहीं आया। इसके बाद सोंगा केराई ने समाज के लोगों के साथ चर्चा की और आदिवासी हो समाज युवा महासभा द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता कार्यक्रमों से प्रेरित होकर अपनी मूल परंपरा में लौटने का निर्णय लिया।

इसी निर्णय के बाद आदिवासी हो समाज युवा महासभा के अनुमंडल सांस्कृतिक सचिव सह हो भाषा शिक्षक कृष्णा तोपनो के नेतृत्व में परिवार की सरना धर्म में वापसी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान चारों सदस्यों को पारंपरिक रूप से धोती-गंजी, साड़ी और गमछा पहनाकर सम्मानित भी किया गया।

इस अवसर पर आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इपिल सामड ने उपस्थित लोगों को हो समाज की प्राचीन परंपराओं, संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं के बारे में जानकारी दी और युवाओं से समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। वहीं जगन्नाथपुर अनुमंडल अध्यक्ष बलराम लागुरी ने लोगों से बोंगा-बुरू की मान्यताओं और समाज की परंपराओं को समझने तथा उनसे जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में ग्रामीण मुंडा गुनाराम अंगरिया, सहयोगी मुंडा राजेश पुरती, आदिवासी हो समाज युवा महासभा के जिला सचिव ओयबन हेम्ब्रम, अनुमंडल अध्यक्ष बलराम लागुरी, अनुमंडल कोषाध्यक्ष बाली लागुरी, गालू पुरती, श्रीराम अंगरिया, माधो टोपना, कालीचरण अंगरिया, साधुचरण अगरिया और बुढ़नसिंह अंगरिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक