प्रशिक्षण लेकर नीलिमा बनीं आत्मनिर्भर, गांव की महिलाओं के लिए हैं प्रेरणास्रोत
-गोबर से बनी अगरबत्ती व धूपबत्ती से बदली नीलिमा की जिंदगी, हर महीने कमा रहीं 9 हजार रुपये -योगी सरकार के प्रोत्साहन के बाद गो आधारित कार्यों से बदल रही ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था अयोध्या, 08 मार्च (हि.स.)। जिले के ग्रामीण इलाकों में योगी स
महिला दिवस


-गोबर से बनी अगरबत्ती व धूपबत्ती से बदली नीलिमा की जिंदगी, हर महीने कमा रहीं 9 हजार रुपये

-योगी सरकार के प्रोत्साहन के बाद गो आधारित कार्यों से बदल रही ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था

अयोध्या, 08 मार्च (हि.स.)। जिले के ग्रामीण इलाकों में योगी सरकार के गो पालन प्रोत्साहन और आजीविका मिशन के प्रयासों से अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है। इसी क्रम में विकास खंड मसौधा के ग्राम पंचायत उसरू अमौना निवासी नीलिमा की कहानी आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल बन गई है। गाय के गोबर से उनकी बनाई अगरबत्ती और धूपबत्ती घर-घर खुशबू फैला रही है। यह न केवल उनकी मेहनत की गवाही देती है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए नया रास्ता भी दिखा रही हैं।

पहले घर के सारे काम संभालने के बावजूद पहले नीलिमा की कोई अलग पहचान नहीं थी। परिवार में आर्थिक तंगी के कारण छोटी-छोटी जरूरतें भी पूरी करना मुश्किल हो जाता था। कई बार उन्हें लगता कि जीवन में कुछ बदलाव की जरूरत है, लेकिन रास्ता नहीं सूझता था। फिर एक दिन नीलिमा स्वयं सहायता समूह (एसजीएच) से जुड़ गईं। समूह में शामिल होकर उन्होंने छोटी-छोटी बचत शुरू की। उनका मन हमेशा आत्मनिर्भर बनने का सपना देखता था। यही सपना उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत देता रहा। एसएचजी के माध्यम से उन्हें विभिन्न योजनाओं और प्रशिक्षणों की जानकारी मिलने लगी।

महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब जानकी प्रेरणा संकुल स्तरीय समिति की बैठक में प्रबंधक विभा पाल (दीदी) ने अगरबत्ती निर्माण के प्रशिक्षण के बारे में बताया। इसके बाद नीलिमा ने बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान से निःशुल्क अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण में उन्हें गाय के गोबर को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल कर पर्यावरण अनुकूल अगरबत्ती, धूपबत्ती और हवन सामग्री बनाने की पूरी तकनीक सिखाई गई।

प्रशिक्षण के बाद नौ हजार मासिक हो गई आय

प्रशिक्षण पूरा होते ही नीलिमा ने घर पर ही छोटे स्तर से उत्पादन शुरू कर दिया। उन्होंने गाय के गोबर से प्राकृतिक सुगंध वाली अगरबत्ती और धूपबत्ती बनानी शुरू कीं। उनके उत्पादों में चुकंदर धूपबत्ती, गुलाब धूपबत्ती, अन्य फूलों और जड़ी-बूटियों से बनी खुशबूदार धूपबत्ती शामिल हैं। ये उत्पाद पूरी तरह प्राकृतिक, रासायनिक मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल हैं, जिसकी वजह से बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ी। शुरुआत में बिक्री सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे स्थानीय दुकानों, मंदिरों और आसपास के इलाकों में उनके उत्पाद पहुंचने लगे। आज लगभग एक वर्ष के भीतर उनकी मासिक आय 8,000 से 9,000 रुपये तक पहुंच गई है। पहले जहां चंद पैसे जुटाना मुश्किल था, वहीं अब नियमित ऑर्डर आने लगे हैं। यह आय उनके परिवार के लिए वरदान साबित हो रही है। इस कार्य में नीलिमा को पति संजय कुमार दूबे का साथ मिला। इस दंपति के दो जुड़वा बच्चे हैं।

नवरात्र में पूजा थाल बनाने की है योजना

नीलिमा की सफलता का असर सिर्फ उनके घर तक सीमित नहीं रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के लिए बेहतर इंतजाम हो रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि नीलिमा अब अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं। उनकी सफलता देखकर कई महिलाएं ऐसे उद्यम की ओर आकर्षित हो रही हैं। भविष्य में नीलिमा और उनका समूह ब्लॉक मिशन प्रबंधन इकाई के सहयोग से नवरात्र के अवसर पर पूजा थाल बनाने की योजना बना रहा है। इससे उनकी आय और बढ़ने की उम्मीद है।

हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय