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नई दिल्ली, 21 मार्च (हि.स.)। देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) अकादमी के बीच शुक्रवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता राष्ट्रीय सुरक्षा प्रशिक्षण को अकादमिक मान्यता प्रदान करने और पेशेवर उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।
दिल्ली स्थित एसएसबी मुख्यालय में आयोजित समारोह में आरआरयू के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. कल्पेश एच. वांड्रा, संबद्धता एवं प्रत्यायन के डीन अविनाश खरेल तथा एसएसबी के महानिदेशक संजय सिंघल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
गृह मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि इस कार्यनीतिक साझेदारी के तहत आरआरयू, एसएसबी अकादमी में संचालित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों को शैक्षणिक मान्यता प्रदान करेगा। दोनों संस्थान संकाय विशेषज्ञता, शैक्षणिक संसाधनों और विशेष प्रशिक्षण सुविधाओं का आदान-प्रदान करेंगे, जिससे अकादमिक अनुसंधान और जमीनी सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटा जा सके।
इस अवसर पर प्रो. वांड्रा ने बताया कि सहयोग के तहत “स्मार्ट सीमा प्रबंधन” जैसे विशेष पाठ्यक्रम पहले ही शुरू किए जा चुके हैं। आरआरयू अपनी अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और क्षेत्र-आधारित कार्यशालाओं के माध्यम से एसएसबी कर्मियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा, जिससे प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आधुनिक और तकनीक-आधारित बन सकें।
एसएसबी महानिदेशक संजय सिंघल ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह साझेदारी बल के अधिकारियों और कर्मियों के कौशल विकास तथा पुनः कौशल पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगी, जिससे वे बदलती आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें।
इस समझौते के तहत आरआरयू एसएसबी के मौजूदा और भावी पाठ्यक्रमों का मूल्यांकन कर उन्हें प्रमाणपत्र, डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की मान्यता प्रदान करेगा। इसके लिए मानकीकृत मूल्यांकन प्रणाली और नियमित पाठ्यक्रम समीक्षा की व्यवस्था भी लागू की जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में स्थापित आरआरयू का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और पुलिसिंग के क्षेत्र में एक अग्रणी शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान के रूप में कार्य करना है।
यह पहल गृह मंत्रालय के “एकीकृत प्रशिक्षण” दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक सीमा प्रबंधन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करेगी। साथ ही एसएसबी कर्मियों को शैक्षणिक मान्यता और करियर उन्नति के नए अवसर भी प्रदान करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार यह साझेदारी भारत की सुरक्षा प्रणाली को और अधिक पेशेवर और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार