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बिलासपुर, 21 मार्च (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ईद-उल-फितर का पर्व पूरे उल्लास और आस्था के साथ मनाया गया। सुबह ईदगाह और मस्जिदों में नमाज अदा कर लोगों ने देश में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ मांगी, वहीं घरों में पकवानों की खुशबू से त्योहार का माहौल और खास बन गया।
बिलासपुर में शनिवार को ईद का पर्व पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही मुस्लिम समुदाय के लोग ईदगाह और मस्जिदों में जुटे, जहां अकीदत के साथ नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और भाईचारे का संदेश दिया।
ईदगाह में नमाज की इमामत मुफ्ती अब्दुल अज़ीम ने की। इस दौरान उनके साथ मौलाना यूसुफ रजा बरकाती और हाफिज मोहम्मद फरीद अशरफी भी मौजूद रहे। नमाज के दौरान सभी ने देश और दुनिया में शांति, सौहार्द और खुशहाली की दुआ मांगी। इससे पहले शुक्रवार को रमजान का आखिरी जुमा, यानी अलविदा जुमा अदा किया गया, जिसमें मस्जिदों में विशेष नमाज के बाद अमन-चैन के लिए दुआएं मांगी गई थीं।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार को चांद नजर नहीं आने के कारण ईद का पर्व एक दिन बाद मनाने का निर्णय लिया गया। देशभर में कहीं से भी चांद दिखने की पुष्टि नहीं होने के बाद 21 मार्च को ईद मनाने का ऐलान किया गया था।
ईद से पहले शहर के बाजारों में भी खूब रौनक रही। कपड़े, इत्र, टोपी और सेवइयों की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रही। घरों में पारंपरिक पकवान बनाए गए, जिनमें सेवइयों की खास मिठास ने त्योहार को और खुशनुमा बना दिया। बच्चों और युवाओं में ईद को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। नए कपड़ों में सजे बच्चे अपने बड़ों के साथ नमाज अदा करने पहुंचे और पूरे दिन खुशियों में शामिल रहे।
इस मौके पर पूरे शहर में आपसी प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश गूंजता रहा, जिसने ईद के पर्व को और खास बना दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय