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भोपाल, 12 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ में बुधवार की रात बैलगाड़ियों से निकली एक बारात ने केवल सभी का ध्यान खींचा है, बल्कि आधुनिक दौर की चमक-दमक को पीछे छोड़कर परंपरा और सादगी की नई मिसाल पेश की है।
दरअसल, आजकल शादियों में लग्जरी कारों और महंगे काफिलों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अजयगढ़ के विश्वकर्मा परिवार ने ईंधन संकट और बढ़ते पेट्रोल-डीजल के खर्च के बीच बैलगाड़ियों पर बारात निकालकर लोगों को हैरान कर दिया। इस शादी से जहां पर्यावरण बचाने का संदेश दिया गया तो वहीं पुरानी परंपरा को भी पुनर्जीवित कर दिया।
बैलगाड़ियों के साथ निकली अनोखी बारात
अजयगढ़ के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. रामखिलावन विश्वकर्मा ने अपने छोटे बेटे की बारात के लिए महंगी गाड़ियों की बजाय पारंपरिक बैलगाड़ियों का चयन किया। उन्होंने इस अनोखी बारात को खास बनाने के लिए जनपद क्षेत्र के गांवों-बीरा, लोलास, शाहपुरा, गड़रियन पुरवा और मझपुरवा से करीब 30 बैलगाड़ियां मंगवाईं। बुधवार देर रात लगभग साढ़े 11 बजे जब बैलों के गले में बंधी घंटियों की मधुर ध्वनि के साथ बारात निकली तो पूरा इलाका पुराने समय की यादों में खो गया। बैलगाड़ियों के साथ-साथ आधा दर्जन नाचते हुए घोड़े और ढोल-नगाड़ों की गूंज ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। इस अनोखी बारात को देखने के लिए सड़कों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कई लोगों ने अपने मोबाइल में इस अनूठे दृश्य को कैद किया। सोशल मीडिया पर भी इस बारात के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं।
ईंधन संकट के बीच दिया बड़ा संदेश
डॉ. रामखिलावन विश्वकर्मा ने बताया कि इस पहल के पीछे उनका उद्देश्य केवल एक अलग शादी करना नहीं था, बल्कि समाज को एक संदेश देना भी था। उनका कहना है कि आधुनिकता की दौड़ में लोग अपनी परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं, जबकि हमारी पुरानी परंपराएं न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हैं बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण पेट्रोलियम पदार्थों का संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि हम वैकल्पिक और पारंपरिक तरीकों को भी याद रखें।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर