दिल्ली विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शनों पर पूरी तरह राेक पर हाई काेर्ट ने उठाए सवाल
नई दिल्ली, 12 मार्च (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय में एक महीने तक सभी प्रकार के प्रदर्शनों पर रोक लगाने के आदेश पर सवाल खड़ा किया है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पूछा कि अगर किसी
दिल्ली उच्च न्यायालय


नई दिल्ली, 12 मार्च (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय में एक महीने तक सभी प्रकार के प्रदर्शनों पर रोक लगाने के आदेश पर सवाल खड़ा किया है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पूछा कि अगर किसी कानून का उल्लंघन होता है, तो पुलिस उस पर कार्रवाई कर सकती है, लेकिन विरोध प्रदर्शन पर पूरे तरीके से रोक लगाना जायज नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने छात्रों के रवैये पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि वो इस मामले पर सुनवाई केवल इसलिए कर रहे हैं कि ये संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति के अधिकारों का मामला है, लेकिन इन अधिकारों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। छात्रों को अपने व्यवहार में सुधार लाना पड़ेगा। ऐसी स्थिति क्यों आने दी गई। प्रॉक्टर एक अकादमिक व्यक्ति होता है। कोई अकादमिक व्यक्ति को ऐसा आदेश देने की नौबत क्यों आयी।

दिल्ली विश्वविद्यालय लॉ फैकल्टी के छात्र उदय भदौरिया ने दायर याचिका में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर की ओर से 17 फरवरी के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी है, जिसमें सार्वजनिक सभाओं, जुलूस प्रदर्शन या पांच व्यक्तियों के जुटने पर दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में रोक लगाई गई है। ये नोटिफिकेशन यूजीसी के इक्विटी गाइडलाइंस के आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के समूहों के बीच झड़पों की खबरें आने के बाद जारी किए गए। कोर्ट ने 25 फरवरी को दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।

दिल्ली विश्वविद्यालय के इस नोटिफिकेशन के बाद किरोड़ीमल कॉलेज और दयाल सिंह कॉलेज ने अपने परिसर में सख्त रुख अपनाते हुए आदेश का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के अलावा निलंबन और निष्कासन की चेतावनी दी है। दोनों कॉलेजों ने अपने छात्रों और स्टाफ को इस संबंध में कोई भी कंटेंट सोशल मीडिया पर अपलोड नहीं करने को कहा है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय का ये नोटिफिकेशन संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लंघन करता है। ये नोटिफिकेशन अकादमिक विमर्श को खत्म कर सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी