नौतोड़ का समाधान नहीं कर पाए मंत्री जगत नेगी : भाजपा
शिमला, 12 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े नौतोड़ के मुद्दे को लेकर राजनीति तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी पर निशाना साधते हुए कहा है कि वे नौतोड़ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे का समाधान क
नौतोड़ का समाधान नहीं कर पाए मंत्री जगत नेगी : भाजपा


शिमला, 12 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े नौतोड़ के मुद्दे को लेकर राजनीति तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी पर निशाना साधते हुए कहा है कि वे नौतोड़ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे का समाधान करने में विफल रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि अपनी असफलता को छिपाने के लिए मंत्री अब राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद को निशाना बना रहे हैं।

शिमला में गुरूवार को मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा प्रवक्ता सूरत नेगी ने कहा कि मंत्री जगत सिंह नेगी का हालिया बयान दुर्भाग्यपूर्ण है और यह संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद के बारे में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना सही नहीं है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मंत्री का यह रवैया उनके राजनीतिक अहंकार और प्रशासनिक असफलता को दर्शाता है।

सूरत नेगी ने कहा कि नौतोड़ का मुद्दा नया नहीं है और पिछले दो से ढाई दशकों से इस पर चर्चा होती रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और उस समय जगत सिंह नेगी विधायक थे, तब ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि नौतोड़ की जमीन केवल भूमिहीन लोगों को ही दी जाएगी। 1975 के अधिनियम में भूमिहीन की स्पष्ट परिभाषा दी गई थी और उसी आधार पर यह शर्त लागू की गई थी।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार ने इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह किया। उस समय फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट 1980 को आंशिक रूप से निलंबित करने की बात कही गई, लेकिन 2006 में लगाई गई ‘लैंडलेस’ की शर्त को नहीं हटाया गया। उनका कहना था कि इस वजह से वास्तविक रूप से किसी भी व्यक्ति को नौतोड़ का लाभ मिलना संभव नहीं हो पाया।

सूरत नेगी ने कहा कि वर्ष 2017 में जब प्रदेश में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी, तब इस पूरे मामले का अध्ययन किया गया और इस शर्त को हटाने का रास्ता तलाशा गया ताकि जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को नौतोड़ का वास्तविक लाभ मिल सके। हालांकि उस समय फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण इस पर तत्काल निर्णय लेना संभव नहीं था।

उन्होंने कहा कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल को कुछ विशेष अधिकार जरूर दिए गए हैं, लेकिन किसी केंद्रीय कानून को सीधे निलंबित करना आसान नहीं है। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया और नियमों का पालन करना जरूरी होता है। भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े कई मामलों में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा