मुरैना: चार आबकारी ग्रुप की 17 दुकानों से मिलेगा 57 करोड़ का राजस्व
- लाइसेंस शुल्क बढऩे से निष्पादन की प्रक्रिया में भाग नहीं ले रहे ठेकेदार
मुरैना: चार आबकारी ग्रुप की 17 दुकानों से मिलेगा 57 करोड़ का राजस्व


मुरैना, 12 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के आबकारी विभाग द्वारा निर्मित 23 ग्रुप की लगभग 59 दुकानों की नीलामी पर संकट दिखाई दे रहा है। इसका मुख्य कारण वर्तमान वर्ष में हुई बिक्री के विरुद्ध लाइसेंस शुल्क में 20 प्रतिशत की वृद्धि किये जाने से शासन को 355 करोड़ रूपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होने की संभावना लगाई गई थी। लेकिन वर्तमान वित्तीय वर्ष में शराब की बिक्री कम होने के कारण लाइसेंसधारी कम्पनी को लगभग 80 करोड़ रूपये का नुकसान होना बताया जा रहा है।

विगत वर्ष सम्पूर्ण जिला की दुकानों की नीलामी 296 करोड़ रूपये में हुई थी। हालांकि 4 प्रयास के दौरान सिर्फ 4 ग्रुप की 17 दुकान की नीलामी हो पाई है। इनसे शासन को मात्र 57 करोड़ का राजस्व मिलेगा। जिला प्रशासन द्वारा शेष 19 ग्रुप की 42 दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया तेज कर दी है। यह दुकान जिला के सभी शहर व कस्बों की बड़ी-छोटी दुकान के रूप में बताई जा रही है। इनसे बड़ा राजस्व मिलने की संभावना कम नजर आ रही है। इस कारण शराब के छोटे कारोबारी दुकानों की बिक्री के मान से लाभ-हानि का गणित लगाकर नीलामी प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं।

शासन को आबकारी विभाग से बड़ा राजस्व मिलता है। प्रतिवर्ष दुकानों की होने वाले निष्पादन की प्रक्रिया वर्तमान में भी संचालित की जा रही है। जिसस कि आगामी 1 अप्रैल से नये लाइसेंसधारी अपने कार्यभार संभालकर शासन को निर्धारित राशि प्रदान कर सके। जिले में अभी तक मात्र 4 ग्रुप की 17 दुकान की नीलामी ही हो पाई है, इनमें बानमौर आरटीओ तथा बड़ोखर दुकानों के ग्रुप प्रमुख हैं। अभी जिला के अम्बाह-पोरसा, जौरा, कैलारस, सबलगढ़ सहित मुरैना शहर के प्रमुख दुकानों की नीलामी होना शेष है। इसकी प्रक्रिया जिला प्रशासन द्वारा तेज गति से संचालित की जा रही है।

बीते एक माह के दौरान निष्पादन की प्रक्रिया के 4 प्रयास किये गये। जिनमें पहले व चौथे प्रयास में एक भी ग्रुप की नीलामी नहीं हो पाई। जबकि दूसरे व तीसरे प्रयास में 2-2 ग्रुप की नीलामी हुई है। आबकारी विभाग द्वारा पूर्व में शासन स्तर से सम्पूर्ण जिले की सभी 59 दुकानें एक ही कम्पनी को दी गई थी। हालात को देखते हुये अधिक से अधिक राजस्व प्राप्त करने के लिये आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 की नीलामी में वर्तमान वर्ष की राशि का 20 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। इससे छोटे शराब ठेकेदार आगामी वर्ष में भी शराब कारोबार में नुकसान की संभावना लगा रहे हैं।

आबकारी विभाग द्वारा आज पांचवां प्रयास शुरू कर दिया है। इसमें भी एक भी ग्रुप का निष्पादन होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। अभी तक चार ग्रुप के निष्पादन का कारण दो ग्रुपों में प्रतिस्पर्धा बताया जा रहा है। जिला आबकारी विभाग भरसक प्रयास में जुटा है कि 31 मार्च से पहले सभी दुकानों की नीलामी होकर अधिक से अधिक राजस्व प्राप्त हो जाये।

खास-खेड़ा के चचेरे भाईयों की जंग में चार ग्रुप की नीलामी

शराब ठेकों में हुये नुकसान तथा आगामी वर्ष के लिये लाइसेंस फीस में वृद्धि के कारण दुकान की नीलामी नहीं हो पा रही है।

जिले में अभी तक चार ग्रुप की नीलामी पूरी हुई है। इन ग्रुपों को लेने के लिये जिले के खास-खेड़ा के चचेरे भाईयों में जोरदार जंग हो गई है। एक भाई जो कि वर्षों से शराब का वैध कारोबार में बड़े ठेकेदारों का सहयोगी था। इस भाई को आगामी वर्ष के लिये जो ठेके मिले हैं, उनके पीछे मध्यप्रदेश के ग्वालियर निवासी एक बड़े ठेकेदार का हाथ बताया जा रहा है। वहीं दूसरा भाई जिले के एक राजनैतिक केन्द्रबिंदू के संरक्षण में काम कर रहा है। इस भाई ने भी दो ग्रुपों पर अपना अधिकार जमा दिया है। दोनों चचेरे भाईयों के शराब कारोबार करने की जिद ने शासन को लाभान्वित कर दिया है।

हिन्दुस्थान समाचार/उपेंद्र

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा