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जयपुर, 11 मार्च (हि.स.)। चैत्र मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी पर बुधवार को राजधानी में लोकपर्व शीतलाष्टमी श्रद्धा, आस्था और परंपरा के साथ मनाई गई। महिलाओं ने सूर्योदय से पहले उठकर ठंडे पानी से स्नान किया और पूजा की थाली सजाकर शीतला माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मंदिरों में माता को विभिन्न ठंडे पकवानों का भोग लगाया गया, वहीं सामाजिक संगठनों की पहल से बड़ी मात्रा में प्रसादी सामग्री जरूरतमंदों और गौशालाओं तक पहुंचाई गई।
महिलाओं ने मिट्टी के नौ कंडवारों में रांधा-पुआ पर बनाए ठंडे पकवान भरकर तथा मिट्टी के करवे में ठंडा पानी लेकर समूह में गीत गाते हुए शीतला माता मंदिर पहुंचकर पूजा की। मंदिरों में माता का रोली, हल्दी, मोली, चावल और मेहंदी से पूजन किया गया तथा दही-राबड़ी, रोटी, पूड़ी, पुए, चावल, चूरमा, हलवा और पचकुट्टे की सब्जी सहित विभिन्न ठंडे व्यंजनों का भोग लगाया गया।
पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने माता को जल अर्पित किया और थोड़ा जल प्रसाद स्वरूप घर लेकर गए। इस जल को घर के सदस्यों ने आंखों पर लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। मंदिर परिसर के बाहर पथवारी पूजन भी किया गया और शीतला माता की कथा सुनी। जहां बुजुर्ग महिलाएं उपलब्ध नहीं थीं, वहां श्रद्धालुओं ने मोबाइल के माध्यम से कथा का श्रवण किया।
परंपरा के अनुसार इस दिन सुबह घरों में चूल्हे नहीं जलाए गए। मंदिर से लाए जल को घर में छिड़कना शुभ माना गया। वहीं शीतला माता के स्वरूप बुजुर्ग महिलाओं को ठंडे पकवानों का भोजन कराकर साड़ी व दक्षिणा भेंट करने की परंपरा भी निभाई गई।
शीतलाष्टमी के अवसर पर गणगौर पूजन करने वाली महिलाओं, युवतियों और नवविवाहिताओं ने कुम्हार के घर से मिट्टी लाकर होली की राख के साथ ईसर, गौरा, रोवां, मालन और कनीराम की प्रतिमाएं बनाई। इसके बाद माली के यहां से दूब, फूल और जल भरकर कलश लाए गए और ईसर-गणगौर का पूजन किया गया।
शाम के समय बालिकाओं ने बींद-बीनणी का स्वरूप धारण कर बिंदौरी निकाली। बींद-बीनणी के पीछे गणगौर पूजन करने वाली महिलाएं नाचती-गाती चल रही थीं और कॉलोनियों में घर-घर वार फेरी की गई। शहर की गलियों में शाम तक बींद-बीनणी की बिंदौरियां निकलने से उत्सव का माहौल बना रहा।
इसी अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से प्रसाद को व्यर्थ होने से बचाने के लिए जनजागरण अभियान भी चलाया गया। श्रद्धालुओं, मंदिर पुजारियों और स्थानीय लोगों के सहयोग से लगभग 5 क्विंटल प्रसादी सामग्री एकत्रित की गई, जिसे देर शाम तक विभिन्न गौशालाओं और जरूरतमंदों तक पहुंचाया गया।
गायत्री परिवार के महिला मंडल के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में महिलाओं के साथ पुरुष कार्यकर्ताओं, मंदिर पुजारियों और स्थानीय नागरिकों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। मंदिर परिसरों में बड़े पात्रों और विशेष थैलियों की व्यवस्था की गई, जिनमें श्रद्धालु महिलाएं प्रसाद डालती रहीं। बाद में इस सामग्री को व्यवस्थित रूप से एकत्र कर गौशालाओं, कच्ची बस्तियों, अनाथालयों और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया गया।
मानसरोवर क्षेत्र में अभियान की कमान संभाल रही नीलम वर्मा ने बताया कि श्रद्धालुओं ने इस पहल की सराहना करते हुए पूरा सहयोग दिया। मानसरोवर के साथ झोटवाड़ा, चारदीवारी, मुरलीपुरा और ब्रह्मपुरी क्षेत्रों में भी यह अभियान सफल रहा और बड़ी मात्रा में प्रसादी सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंचाई गई। इस तरह शीतलाष्टमी पर राजधानी में भक्ति और परंपरा के साथ सेवा का भाव भी देखने को मिला।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश