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भोपाल, 09 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गौवंश हत्या और इससे जुड़े दूषित पानी के मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमाया हुआ है। इस मामले को लेकर आज सोमवार को कांग्रेस पार्टी बड़ा प्रदर्शन करने जा रही है, वहीं कुछ हिंदू संगठन भी अलग-अलग स्तर पर विरोध जताने की तैयारी में हैं।
दरअसल, पिछले दिनों भोपाल नगर निगम के स्लॉटर हाउस से 26 टन से अधिक संदिग्ध गौ मांस पकड़े जाने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया था। जांच के दौरान गौवंश की हत्या की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए स्लॉटर हाउस को सील कर दिया था। इस घटनाक्रम ने शहर में धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गहरी प्रतिक्रिया पैदा की थी।
अब इस मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि स्लॉटर हाउस से निकलने वाला गंदा पानी और अवशेष पात्रा नाले के जरिए हलाली डैम में छोड़े जा रहे हैं। यह वही डैम है, जहां से बड़ी आबादी के लिए पानी की आपूर्ति होती है। स्थानीय लोगों और विपक्ष का कहना है कि इससे पानी दूषित हो रहा है और नागरिकों को मजबूरन गंदा पानी पीना पड़ रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी आज भोपाल नगर निगम के मुख्य दफ्तर, जो कि आईएसबीटी परिसर में स्थित है, का घेराव करेगी। पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना है। प्रदर्शन के दौरान पुतला दहन, नारेबाजी और विरोध सभा आयोजित किए जाने की भी तैयारी है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार के शासन में प्रशासन की नाक के नीचे गौवंश की हत्या हो रही है और अब इस मामले से जुड़ी पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इससे आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
कांग्रेस ने इस पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही महापौर और नगर निगम के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की भी मांग उठाई है। पार्टी का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर हुई घटना और दूषित पानी की शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। वहीं, हिंदू संगठनों की ओर से भी इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया जा रहा है, जिससे शहर का माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी