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शिवपुरी, 06 फ़रवरी (हि.स.)। आज के समय में जब देश के अधिकांश गांव नशा, घरेलू हिंसा और अपराध जैसी सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की करैरा तहसील में स्थित ग्राम मतवारी एक ऐसी मिसाल है, जो आधुनिक भारत को उसकी सांस्कृतिक जड़ों की याद दिलाता है। लगभग 600 की आबादी वाला यह छोटा-सा गांव अपने भीतर एक बड़ा सामाजिक संदेश समेटे हुए है, यहां न कोई शराब पीता है और न ही मांस का सेवन करता है।
ग्रामीणों का दावा है कि गांव की स्थापना के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है। मतवारी के बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और बच्चे—सभी एक स्वर में मानते हैं कि गांव की यह विशेषता देवी-देवताओं की कृपा और सामूहिक सामाजिक अनुशासन का परिणाम है।
तीन पीढ़ियों की गवाही-
80 वर्षीय किशन लाल कुशवाह बताते हैं कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में गांव के किसी भी व्यक्ति को शराब या मांस का सेवन करते न देखा है और न ही ऐसी कोई चर्चा कभी सुनी है। यह बात दर्शाती है कि मतवारी की सामाजिक व्यवस्था केवल दिखावा नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाई जा रही जीवनशैली है।
परंपरा से चलता सामाजिक नियंत्रण-
गांव के निवासी मोहन सिंह कुशवाह और रघुवीर पाल बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति गांव की मर्यादा का उल्लंघन करता है तो उसे सामाजिक और दैवी दंड का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण मान्यताओं के अनुसार, परंपराओं की लक्ष्मण रेखा पार करने वालों को दैवी संकेतों और शारीरिक कष्टों के रूप में चेतावनी मिलती है, जिसके बाद संबंधित व्यक्ति सार्वजनिक रूप से माफी मांगता है और दोबारा ऐसी भूल न करने का संकल्प लेता है। यह व्यवस्था भले ही आधुनिक कानून से अलग हो, लेकिन इसका प्रभाव गांव में अनुशासन और नैतिकता बनाए रखने में निर्णायक साबित हुआ है।
महिला सुरक्षा की अनूठी मिसाल-
व्यसन-मुक्त वातावरण का सीधा असर महिलाओं के जीवन पर भी दिखता है। गांव की महिला लीलावती पाल, जिनकी शादी को 22 वर्ष हो चुके हैं, कहती हैं कि उन्हें आज तक किसी भी प्रकार की पारिवारिक या सामाजिक असुरक्षा का सामना नहीं करना पड़ा। गांव की महिलाएं स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करती हैं जो देश के कई हिस्सों के लिए आज भी एक सपना है।
अपराध-मुक्त गांव-
मतवारी गांव की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह आज भी पूरी तरह अपराध-मुक्त है। आपसी विवाद होने पर भी ग्रामीण थाने का रुख करने के बजाय पंचायत और आपसी संवाद से समाधान निकाल लेते हैं। इस तथ्य की पुष्टि करते हुए करैरा थाना प्रभारी विनोद सिंह छावई कहते हैं कि मतवारी गांव से संबंधित किसी भी व्यक्ति का कोई आपराधिक रिकॉर्ड थाने में दर्ज नहीं है। यह बात प्रशासनिक दृष्टि से भी गांव को विशिष्ट बनाती है।
देश के लिए एक मॉडल-
ग्राम मतवारी यह सिद्ध करता है कि यदि समाज स्वयं अनुशासन और नैतिक मूल्यों को अपनाए, तो कानून और पुलिस की आवश्यकता स्वतः कम हो जाती है। नशा-मुक्ति, महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण जैसे मुद्दों पर यह गांव राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन और अनुकरण के योग्य मॉडल बन चुका है। आज जब भारत “विकसित राष्ट्र” बनने की ओर अग्रसर है, तब ग्राम मतवारी जैसे गांव यह याद दिलाते हैं कि सच्चा विकास केवल इमारतों और सड़कों से नहीं, बल्कि चरित्र, संस्कृति और सामूहिक चेतना से होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / युगल किशोर शर्मा