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शिमला, 10 फ़रवरी (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील में हिमाचल प्रदेश सहित देशभर के सेब बागवानों के हितों का पूरा ध्यान रखा है और किसी भी स्तर पर उनसे समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और न्यूज़ीलैंड के साथ हुए व्यापारिक समझौतों से देश के बागवानों को कोई नुकसान नहीं होगा।
मंगलवार को शिमला से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सेब के लिए न्यूनतम आयात मूल्य, सीमित आयात कोटा, मौसमी समय-सीमा और सेफगार्ड प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। इन व्यवस्थाओं के कारण सस्ता विदेशी सेब भारतीय बाजारों में प्रवेश नहीं कर सकता और हिमाचल के बागवानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।
उन्होंने बताया कि यूरोपीय यूनियन से आने वाले सेब पर ₹80 प्रति किलो का न्यूनतम आयात मूल्य लागू है, जिससे उनकी लैंडेड कीमत ₹96 प्रति किलो से कम नहीं होती। न्यूज़ीलैंड से आयातित सेब उच्च न्यूनतम आयात मूल्य और शुल्क के चलते लगभग ₹140 प्रति किलो की प्रीमियम श्रेणी में ही आते हैं। इसी तरह अमेरिका से आने वाले सेब पर ₹80 प्रति किलो का न्यूनतम आयात मूल्य और 25 प्रतिशत आयात शुल्क लागू होने के बाद उनकी लैंडेड कीमत लगभग ₹105 प्रति किलो रहती है। इसके अलावा सभी देशों के लिए आयात कोटा निर्धारित है और तय सीमा से अधिक आयात पर शुल्क और बढ़ जाता है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि देश में सेब का कुल घरेलू उत्पादन लगभग 22 लाख मीट्रिक टन है, जबकि आयात करीब 5.5 लाख मीट्रिक टन के आसपास ही है, जो पूरी तरह नियंत्रित और विनियमित ढांचे के अंतर्गत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दल सेब के मुद्दे पर केवल भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। जयराम ठाकुर ने बागवानों को आश्वस्त किया कि भारतीय जनता पार्टी उनकी आवाज़ के साथ मजबूती से खड़ी है और भविष्य में भी सेब उत्पादकों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला