जलवायु आपदा पर नेपाल का आपातकालीन प्रस्ताव आईपीयू महासभा में दो-तिहाई बहुमत से पारित
काठमांडू, 08 अक्टूबर (हि.स.)। तंजानिया के अरुशा में जारी अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की 153वीं महासभा में नेपाल द्वारा प्रस्तुत जलवायु जनित आपदाओं से संबंधित आपातकालीन प्रस्ताव दो-तिहाई बहुमत से पारित हो गया है। नेपाली संसद के स्पीकर डोल प्रसाद (डीपी
अंतर संसदीय संघ की बैठक


काठमांडू, 08 अक्टूबर (हि.स.)। तंजानिया के अरुशा में जारी अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की 153वीं महासभा में नेपाल द्वारा प्रस्तुत जलवायु जनित आपदाओं से संबंधित आपातकालीन प्रस्ताव दो-तिहाई बहुमत से पारित हो गया है।

नेपाली संसद के स्पीकर डोल प्रसाद (डीपी) अर्याल द्वारा प्रस्तुत ‘हिमालयी क्षेत्र तथा अन्य जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में जलवायु संबंधी आपदाओं से निपटने और लचीलापन मजबूत करने के लिए तत्काल संसदीय कदम’ शीर्षक वाले आपातकालीन एजेंडे को महासभा में दो-तिहाई बहुमत मिला।

इस अवसर पर स्पीकर अर्याल ने हिमालय को मानवता की साझा विरासत और एशिया का ‘वाटर टावर’ बताते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय, ग्लेशियरों और हिमतालों पर बढ़ता खतरा पूरी मानव सभ्यता के लिए चुनौती बन रहा है।

नेपाल द्वारा हाल में झेली गई जलवायुजनित आपदाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जलवायु न्याय और संसदीय जवाबदेही के लिए दुनिया की संसदों के बीच साझा जिम्मेदारी और सहयोग आवश्यक है।

अर्याल ने कहा कि महासभा द्वारा नेपाल के प्रस्ताव को पारित किया जाना केवल नेपाल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आईपीयू के सभी सदस्य देशों और सांसदों की भी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने जलवायुजनित आपदाओं से निपटने के लिए संसदीय जलवायु कूटनीति को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

प्रस्ताव में सदस्य देशों के बीच जलवायु और मौसम संबंधी सीमापार पूर्व चेतावनी प्रणाली तथा तकनीक तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कानूनी ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन के लिए संबंधित देशों की कार्यपालिका को संसदीय स्तर से जवाबदेह बनाने की आवश्यकता भी प्रस्ताव में उठाई गई है।

स्पीकर अर्याल ने विश्व समुदाय से दोषारोपण के बजाय जलवायु आपदाओं से प्रभावित लोगों की सुरक्षा, न्याय और सुरक्षित भविष्य के लिए साझा समाधान विकसित करने का आह्वान किया। आपातकालीन प्रस्ताव को एजेंडे में शामिल करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के उद्देश्य से सभामुख अर्याल ने महासभा के सदस्यों से समर्थन मांगा था।

प्रस्ताव पर मतदान

- पक्ष में: 901 वोट

- विपक्ष में: 78 वोट

- तटस्थ: 140 वोट

आईपीयू महासभा के नियम 11(ख) के अनुसार, यदि एक से अधिक आपातकालीन प्रस्ताव आवश्यक बहुमत हासिल करते हैं, तो सबसे अधिक सकारात्मक वोट पाने वाले प्रस्ताव को एजेंडे में शामिल किया जाता है। इसी व्यवस्था के तहत सबसे अधिक सकारात्मक मत प्राप्त करने वाले नेपाल के प्रस्ताव को आपातकालीन विषय के रूप में चुना गया।

अब नेपाल के प्रस्ताव पर आईपीयू की 153वीं महासभा के आपातकालीन एजेंडे के तहत चर्चा होगी। चर्चा में जलवायुजनित आपदाओं से उत्पन्न चुनौतियों, हिमालय और ग्लेशियरों के संरक्षण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी प्रणाली, तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग तथा जोखिम वाले क्षेत्रों में लचीलापन बढ़ाने के लिए आवश्यक संसदीय पहलों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास