किशोर को पाक्सो मामले में मिली सशर्त जमानत, हाईकाेर्ट ने कहा - जमानत नियम है, इन्कार अपवाद
प्रयागराज, 13 अक्टूबर (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आजमगढ़ के बाल संप्रेक्षण गृह में बंद 17 साल 9 महीने के किशोर को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने किशोर न्याय बोर्ड व पाक्सो कोर्ट के जमानत खारिज करने के दोनों आदेशों को रद्द कर दि
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की फोटो


प्रयागराज, 13 अक्टूबर (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आजमगढ़ के बाल संप्रेक्षण गृह में बंद 17 साल 9 महीने के किशोर को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने किशोर न्याय बोर्ड व पाक्सो कोर्ट के जमानत खारिज करने के दोनों आदेशों को रद्द कर दिया और सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति जय प्रकाश तिवारी ने यह आदेश आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर दिया।

थाना मेहनगर, जिला आजमगढ़ में दर्ज आपराधिक मामले में किशोर को पाक्सो व एस सी एस टी एक्ट में आरोपी बनाया गया था। वह 19.दिसंबर.2025 से अभिरक्षा में है। घटना के समय उसकी उम्र 17साल 9 महीने बताई गई।

अधिवक्ता ने कहा कि डी पी ओ रिपोर्ट में कोई ठोस आपत्ति नहीं है, सिर्फ सामान्य टिप्पणी है। पीड़िता के मेडिकल में शरीर पर कोई अंदरूनी या बाहरी चोट नहीं मिली। रेडियोलॉजिकल रिपोर्ट में पीड़िता की उम्र 16 से 18 साल के बीच है। किशोर का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

न्यायालय ने कहा जमानत देना नियम है, इन्कार अपवाद है। जमानत तभी रोकी जा सकती है जब तीन स्थितियां हों - (1) रिहाई से किशोर किसी ज्ञात अपराधी के संपर्क में आएगा, (2) नैतिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक खतरे में पड़ेगा, (3) रिहाई से न्याय का उद्देश्य विफल होगा।

न्यायालय ने कहा कि बोर्ड व अपीलीय कोर्ट के निष्कर्ष कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत हैं। इसलिए दोनों आदेश निरस्त किए जाते हैं। पुनरीक्षण स्वीकार किया जाता है।

हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे