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मुंबई, 13 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को मुंबई में कहा कि 2047 तक भारत को मैरीटाइम सुपरपावर बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक और दीर्घकालिक योजना पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद के सिद्धांत पर आधारित संयुक्त प्रयास भारत के समुद्री क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुंबई के होटल ट्राइडेंट में मैरीटाइम स्टेट्स डेवलपमेंट काउंसिल (एमएसडीसी) की 21वीं दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों, बंदरगाह प्राधिकरणों, समुद्री बोर्डों और केंद्रीय मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सोनोवाल ने कहा कि मई 1997 में प्रमुख और गैर-प्रमुख बंदरगाहों के एकीकृत विकास के लिए स्थापित एमएसडीसी को इंडियन पोट्र्स एक्ट, 2025 के तहत वैधानिक सलाहकार निकाय का दर्जा मिलने से इसकी संस्थागत भूमिका मजबूत हुई है। इससे बंदरगाह विकास से संबंधित जिम्मेदारियों, जवाबदेही और केंद्र-राज्य समन्वय को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस बैठक को केवल पिछली गतिविधियों की समीक्षा तक सीमित न रखते हुए भारत की भविष्य की समुद्री विकास यात्रा के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने देश की 11,900 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की समुद्री विरासत पांच हजार वर्षों से भी अधिक पुरानी है। गुजरात के लोथल और भरूच, महाराष्ट्र के वाडा, ओडिशा के बालासोर, केरल के मुजिरिस और कोच्चि तथा तमिलनाडु के नागपट्टिनम जैसे ऐतिहासिक समुद्री केंद्रों ने भारत को प्राचीन व्यापार मार्गों से जोड़ा था। इन मार्गों के माध्यम से चावल, मोती, लकड़ी, हाथीदांत, रेशम और तांबे जैसी वस्तुओं का व्यापार होता था। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य भारतीय ध्वज वाले जहाजों की क्षमता बढ़ाना, जहाज मरम्मत और पुनर्चक्रण क्षेत्रों का विस्तार करना तथा 2047 तक जहाज निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल होना है।
इस अवसर पर गुजरात के वित्त मंत्री कनुभाई देसाई, गोवा के बंदरगाह विकास मंत्री दिगंबर कामत और पुडुचेरी के मत्स्य मंत्री मल्लाडी कृष्ण राव सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव