बांग्लादेशी नागरिक को जल्द देश से बाहर भेजने का आदेश, उच्च न्यायालय ने अधिकारियों से मांगी अनुपालन रिपोर्ट
रांची, 13 अक्टूबर (हि.स.)। झारखंड उच्च न्यायालय ने बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद नजमुल हवलदार की आपराधिक अपील खारिज करते हुए उसे जल्द बांग्लादेश प्रत्यर्पित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि विदेशी नागरिकों के निर्वासन की प्रक्रिया में अनावश्
उच्च न्यायालय फाइल फोटो


रांची, 13 अक्टूबर (हि.स.)। झारखंड उच्च न्यायालय ने बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद नजमुल हवलदार की आपराधिक अपील खारिज करते हुए उसे जल्द बांग्लादेश प्रत्यर्पित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि विदेशी नागरिकों के निर्वासन की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की अदालत ने झारखंड और पश्चिम बंगाल के अधिकारियों और केंद्र सरकार के संबंधित विभागों को इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अदालत ने 25 नवंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

मोहम्मद नजमुल हवलदार बांग्लादेश के बागेरहाट जिले के मोरेल थाना क्षेत्र के शांतिभंगा गांव का निवासी है। पुलिस के अनुसार, 24 फरवरी 2023 की रात गुप्त सूचना के आधार पर उसे साहिबगंज जिले के तालझारी रेलवे स्टेशन के पास पकड़ा गया था। पूछताछ में उसने बताया था कि वह बिना पासपोर्ट और वैध यात्रा दस्तावेजों के भारत में दाखिल हुआ था। उसने मोहम्मद सागर नामक व्यक्ति की मदद से भारत आने और दिल्ली में कबाड़ का काम करने की बात कही थी।

इस मामले में विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14ए(बी) और 14(सी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में नजमुल ने अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया। राजमहल के तत्कालीन अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम ने 15 जून 2024 को उसे दोषी करार दिया था। 19 जून 2024 को उसे दो वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नजमुल ने अपनी सजा पूरी कर ली थी। इसके बाद एक मार्च 2025 को उसे हजारीबाग स्थित विदेशी नागरिक निरोध केंद्र में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया के लिए भेजा गया था। हालांकि, नौ जून 2025 को वह दो अन्य बांग्लादेशी महिलाओं के साथ वहां से फरार हो गया। बाद में पुलिस ने उसे पकड़ लिया और इस मामले में हजारीबाग के लोहसिंघना थाने में एक नया मामला दर्ज किया गया।

सरकार के अनुसार, नजमुल को बांग्लादेश वापस भेजने के लिए उसकी नागरिकता और पते के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। बांग्लादेश के उप उच्चायोग ने पांच मार्च 2025 को उसके पते का सत्यापन नहीं हो पाने की सूचना दी थी। हालांकि, बाद में एक जुलाई 2025 के पत्र में उसके पते का सत्यापन होने और उसे बांग्लादेश वापस भेजने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का उल्लेख किया गया।

उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि जब विदेशी नागरिक अपनी सजा पूरी कर चुका हो और उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू हो गई हो, तो संबंधित अधिकारियों को इसे शीघ्र पूरा करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

अदालत ने टिप्पणी की कि निर्वासन की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। उसने झारखंड सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार के संबंधित अधिकारियों की ओर से समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने पर चिंता व्यक्त की। अदालत ने पाया कि नजमुल ने 15 जून 2024 को अपना अपराध स्वीकार किया था। ऐसे में उसकी अपील सुनवाई योग्य नहीं है।

इसी आधार पर क्रिमिनल अपील संख्या 341/2025 खारिज कर दी गई। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश की प्रति झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों, संबंधित गृह सचिवों, उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों के अलावा केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश का अनुपालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की लापरवाही को गंभीरता से लिया जा सकता है। राज्य सरकार के अधिकारियों को 25 नवंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसे उच्च न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे