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शिमला, 13 अक्टूबर (हि.स.)। जिस ई-चालान की राशि सरकारी खजाने में जमा होनी थी, उसमें हेराफेरी कर 20 हजार रुपये निजी गूगल पे खाते में लेने के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बर्खास्त कांस्टेबल की अपील खारिज कर दी है। हाई कोर्ट ने मामले की नए सिरे से जांच कराने के अपीलीय प्राधिकरण के आदेश को सही ठहराया है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। मामला बिलासपुर जिले का है, जहां संबंधित कांस्टेबल ट्रैफिक क्लर्क के पद पर तैनात था। उस पर ई-चालान में बदलाव करने और वाहन चालक से रिश्वत के 20 हजार रुपये अपने निजी गूगल पे खाते में लेने के आरोप थे।
मामले के अनुसार 3 मई 2023 को ट्रैफिक पुलिस ने एक वाहन का चालान शराब पीकर गाड़ी चलाने यानी 'ड्रिंक एंड ड्राइव' के तहत काटा था। इस तरह के चालान का निपटारा पुलिस स्तर पर समझौते के जरिए नहीं किया जा सकता। आरोप है कि कांस्टेबल ने उच्च अधिकारियों की अनुमति के बिना ऑनलाइन ई-चालान एप में बदलाव किए। उसने अदालत में जमा होने वाले जुर्माने की राशि को शून्य और 5 हज़ार रुपये दर्शाया।
जांच में पाया गया कि वाहन चालक से उसके वकील के माध्यम से 20 हजार रुपये कांस्टेबल के निजी गूगल पे खाते में ट्रांसफर करवाए गए थे। यह राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं हुई थी। इस मामले में कांस्टेबल को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उसने इस कार्रवाई के खिलाफ अपील की। अपीलीय प्राधिकरण ने मामले की नए सिरे से जांच कराने का आदेश दिया था। कांस्टेबल ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन खंडपीठ ने उसकी अपील खारिज कर दी और नए सिरे से जांच कराने के आदेश को बरकरार रखा।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा