Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

दंतेवाड़ा, 13 अक्टूबर (हि.स.)। नवरात्रि के दौरान मां दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा में दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन और पंचायतों ने दंतेवाड़ा, गीदम और आस-पास के क्षेत्रों में सामुदायिक भवन, धर्मशाला और रैन बसेरों को चिह्नित किया है। इन जगहों पर उपलब्ध क्षमता के अनुसार श्रद्धालु रुक सकेंगे। ठहरने के प्रमुख स्थलों की लोकेशन क्यूआर कोड स्कैन करके देखी जा सकती है। प्रशासन ने व्यवस्था की जानकारी के लिए संबंधित प्रभारियों के संपर्क नंबर भी जारी किए हैं।
दंतेवाड़ा शहर और मंदिर के आस-पास नवीन धर्मशाला भवन में 100, आश्रय स्थल में 50 और बस स्टैंड स्थित रैन बसेरा में 30 लोगों के रुकने की व्यवस्था है। वार्ड क्रमांक-2 स्थित शुभ लग्न वाटिका में 100 लोगों के ठहरने की सुविधा है। इसके अलावा पातररास सामुदायिक भवन में 25 और ग्राम पंचायत बालपेट के अंतर्गत भैरमबंद स्थित रीपा परियोजना भवन में 300 लोगों के रुकने की व्यवस्था की गई है।
गीदम में तहसील कार्यालय के पास एनएच-63 से लगे श्रीराम धर्मशाला में 110 लोगों और पुराने बाजार के पीछे स्वर्णकार समाज मंगल भवन में 200 लोगों के रुकने की व्यवस्था है। स्वर्णकार समाज मंगल भवन एनएच-63 से करीब 100 मीटर दूर है। हाईस्कूल के पास नगर पंचायत का सांस्कृतिक भवन भी ठहरने के लिए चिह्नित किया गया है। यहां 100 से 200 लोगों के रुकने की सुविधा है। वहीं, शक्तिस्थल के पास स्कूल पारा स्थित चितालंका सामुदायिक भवन में 50 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है।
केंद्रीय विद्यालय चौक और महतारी सदन के पास उपलब्ध भवनों में भी 50 से 60 लोगों के रुकने की सुविधा है। श्रद्धालु ठहरने के प्रमुख स्थलों पर पहुंचने के लिए QR कोड स्कैन कर लोकेशन की जानकारी ले सकेंगे। इससे संबंधित जगह तक पहुंचने में आसानी होगी। प्रशासन ने महेश ठाकुर, राजेंद्र सोनी, बुधराम यादव और उषा नागेश सहित संबंधित स्थलों के प्रभारियों के संपर्क नंबर भी जारी किए हैं। श्रद्धालु ठहरने की व्यवस्था से जुड़ी जानकारी और सहायता के लिए संबंधित प्रभारियों से संपर्क कर सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि नवरात्र के दौरान मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने की सुविधा देने के लिए इन स्थलों को चिह्नित किया गया है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे