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शिमला, 09 जनवरी (हि.स.)। भाजपा के प्रदेश महामंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर आए उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने पंचायत चुनावों को लगातार टालने की सरकार की नीयत पर करारा प्रहार किया है और पंचायती राज संस्थाओं में लोकतंत्र बहाल करने का रास्ता साफ किया है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने शुक्रवार को कहा कि पिछले कई महीनों से कांग्रेस सरकार कभी आपदा प्रबंधन अधिनियम का हवाला देकर तो कभी प्रशासनिक अड़चनों का बहाना बनाकर पंचायत चुनावों से बचती रही। सरकार चुनाव कराने के बजाय लगातार टालने के बहाने खोजती रही, लेकिन हाईकोर्ट ने सरकार की सभी दलीलों को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पंचायत चुनाव कराना अनिवार्य है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पंचायत चुनावों से इसलिए भाग रही थी क्योंकि उसे अपनी नाकामियों का डर था। सरकार जानती थी कि चुनाव होने पर उसे जनता के सामने अपने कामकाज का हिसाब देना पड़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में उसे हार का सामना करना पड़ सकता है। डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि अब जब अदालत का फैसला सरकार के खिलाफ आया है, तो कांग्रेस नेताओं और मुख्यमंत्री की बौखलाहट साफ दिखाई दे रही है। पहले चुनाव टालने के लिए बहाने बनाए गए और अब हाईकोर्ट के फैसले पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं, जो न्यायपालिका का अपमान है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण भारत की रीढ़ हैं। इनके बिना न तो विकास संभव है और न ही आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सकती है। पंचायतों के बिना ग्रामीण विकास की योजनाएं ठप पड़ जाती हैं और जनता की आवाज दब जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने चुनाव टालकर न सिर्फ लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की, बल्कि जानबूझकर ग्रामीण विकास को भी रोका।
उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय का यह फैसला ऐतिहासिक और साहसिक है। इससे प्रदेश में लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण जनता को अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार वापस मिलेगा। डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि भाजपा इस फैसले का स्वागत करती है और उम्मीद करती है कि अब सरकार बिना देरी किए पंचायत चुनाव कराएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा