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नई दिल्ली, 09 जनवरी (हि.स.)। साकेत कोर्ट की पांचवीं मंजिल से शुक्रवार काे 60 फीसदी दिव्यांग एक कर्मचारी ने कूदकर जान दे दी। वह जज नंदिनी गर्ग की कोर्ट में अहलमद के पद पर तैनात था। आत्महत्या की घटना के बाद साकेत कोर्ट के सभी स्टाफ धरने पर बैठ गए। इस घटना पर वकील और राष्ट्रीय दिव्यांग अधिकार मंच के अध्यक्ष दिलीप कुमार ने रोष जताते हुए इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।
हरीश सिंह महार ने मौके से एक नोट भी छोड़ा है, जिसमें काम का अत्यधिक दबाव बनाने की बात कही गई है। नोट में कहा गया है कि अहलमद का काम संभालने के बाद से ही उसे खुदकुशी का विचार आने लगा था, लेकिन उसने अपनी खुदकुशी का इरादा किसी से शेयर नहीं किया। नोट में कहा गया है कि उसे लगा कि वो अपनी समस्या से बाहर आ जाएगा, लेकिन वो इसमें विफल रहा।
सुसाइड नोट में कहा गया है कि उसके लिए अहलमद का काम काफी कठिन है। वो रात में ठीक से साे नहीं पाता था। वो सोचता था कि अगर वो जल्दी रिटायरमेंट लेता है, तो भी उसे सेवानिवृत्ति का लाभ 60 की उम्र के बाद ही मिलेगा। सुसाइड नोट में हरीश सिंह महार ने दिल्ली उच्च न्यायालय से आग्रह किया है कि आगे से वो किसी दिव्यांग को कोई हल्की जिम्मेदारी वाला पद दें।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी