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शिमला, 09 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव तय समय सीमा के भीतर कराने का अहम आदेश दिया है। न्यायालय ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं कि पंचायत चुनाव 30 अप्रैल से पहले पूरे करवाए जाएं। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी सभी औपचारिकताएं 28 फरवरी तक पूरी कर ली जाएं। इनमें मतदाता सूची का अद्यतन, आरक्षण रोस्टर तय करना और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं शामिल हैं।
यह फैसला न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने शुक्रवार को सुनाया।
प्रदेश उच्च न्यायालयने यह निर्णय उस जनहित याचिका पर दिया, जिसमें समय पर पंचायत चुनाव न करवाने को लेकर राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए गए थे। कोर्ट ने दो दिन पहले इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब सुनाया गया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव टालने के पीछे आपदा की स्थिति का हवाला दिया था। सरकार का कहना था कि हाल ही में आई प्राकृतिक आपदाओं, खराब सड़क संपर्क और परिसीमा निर्धारण की प्रक्रिया के चलते चुनाव करवाना फिलहाल व्यावहारिक नहीं है। सरकार ने यह भी दलील दी कि उसे चुनाव कराने के लिए कम से कम छह महीने का अतिरिक्त समय चाहिए।
हालांकि न्यायालय ने सरकार के इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और समय पर चुनाव कराना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। न्यायालय ने यह भी माना कि आपदा या परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं का हवाला देकर चुनावों को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य चुनाव आयोग समय पर पंचायत चुनाव कराने के लिए लगातार सरकार को पत्र लिख रहा था, लेकिन राज्य सरकार डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट का हवाला देकर चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा रही थी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी उल्लेख किया, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव समय पर कराना अनिवार्य है। न्यायालय ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए कि वह तय समय सीमा में चुनाव कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए और संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करे।
इस मामले की पृष्ठभूमि की बात करें तो राज्य सरकार ने 8 अक्टूबर को पंचायत चुनाव स्थगित करने का आदेश जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि मानसून 2025 के दौरान आई आपदा के कारण प्रदेश में भारी नुकसान हुआ है। कई जिलों में सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई थीं और कनेक्टिविटी प्रभावित हुई थी। इसी आधार पर सरकार ने दिसंबर में प्रस्तावित पंचायत चुनाव टालने का फैसला लिया था।
यह आदेश डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 की धारा 24(e) के तहत जारी किया गया था। मुख्य सचिव और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने यह आदेश जारी करते हुए कहा था कि आम जनता और मतदान कर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। कई जिलों के उपायुक्तों ने भी खराब सड़क हालात का हवाला देते हुए पंचायत राज विभाग को पत्र लिखे थे।
इसके बाद इस फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई। अब हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद साफ हो गया है कि हिमाचल में पंचायत चुनाव तय समय के भीतर कराना अनिवार्य होगा और राज्य सरकार को इसके लिए सभी जरूरी तैयारियां समय पर पूरी करनी होंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा